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चीते सी फुर्ती और बाज सी नजर से चीन को लद्दाख में मात देने की रणनीति पर चल रहा है भारत

Wed, 02 Sep 2020 01:47 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सैनिकों के पास हथियारों तो होंगे, लेकिन बिना उनका इस्तेमाल किए दिखाएंगे आक्रामकता
  • उकसावे की रणनीति में न फंसने की सलाह
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China Type-15 Tank - फोटो : For Refernce Only
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विस्तार
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लद्दाख में चीन जिस भाषा को समझता है, भारतीय सैन्य बलों ने उसी रणनीति पर काम तेज कर दिया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भारतीय सैन्य बलों की इस रणनीतिक तैयारी से सहमत नजर आ रहे हैं। नई रणनीति में सैन्य बल चीते सी फुर्ती और बाज सी नजर के साथ अत्मरक्षा में हथियारों के साथ बिना उनका प्रयोग किए चीन की रणनीति को विफल करने में लगे हैं। इसी रणनीति ने मंगलवार को चीन को कई बार बयान बदलने पर मजबूर कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी करीब डेढ़ महीने बाद फिर आक्रमकता दिखाई और चीन से अपने सैनिकों को काबू में रखने की अपील की।

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टकराव थोपा जाएगा तो मुंहतोड़ जवाब देंगे

सैन्य सूत्र बताते हैं कि भारतीय सेना ने मिलिट्री डिप्लोमेसी के साथ अपनी सतर्कता को बनाए रखने का संदेश दिया है। लेफ्टिनेंट जनरल (रिटा.) बलवीर सिंह संधू का कहना है कि सेना ने चीन की फौज को साफ संदेश दिया है। हमने बताया है कि हम रक्षात्मक ही नहीं आक्रामक भी हैं। जनरल संधू का कहना है कि इससे साफ संदेश जाता है कि भारत पड़ोसी देश चीन के साथ टकराव नहीं चाहता, लेकिन यदि इसे थोपा गया तो सामानंतर और मुंहतोड़ जवाब देने में नहीं हिचकेंगे।

वायुसेना के एयरवाइस मार्शल (रिटा.) एनबी सिंह के मुताबिक की स्पांगुर लेक, स्पांगुर गैप क्षेत्र (पैंगोंग का दक्षिणी किनारा) में भारतीय सैन्य बलों के फुर्तीले आपरेशन ने एक नमूना पेश कर दिया है। इसका अर्थ  है कि भारतीय सैन्य बल किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हैं। एयर वाइस मार्शल सिंह कहते हैं कि अब चीन को तय करना है कि आगे किस तरह का रिश्ता चाहता है।

चीन की घुसपैठ रोकना, अपने क्षेत्र पर काबिज होना ही मुख्य लक्ष्य

29-30 अगस्त के चीनी घुसपैठ के जवाब में भारतीय सैन्य आपरेशन से साफ है कि भारतीय सैन्य बल चीन की घुसपैठ को रोकने, उसकी आगे बढ़ने की कोशिशों को नाकाम करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा भारतीय सैन्य बलों का लक्ष्य चीनी घुसपैठ के बाद उसके कब्जे में चले गए अपने क्षेत्र पर काबिज होना है।

पूर्व विदेश सचिव शशांक भी इसे भारतीय सैन्य बलों का अच्छा टैक्टिकल मूव मानते हैं। रक्षा मामलों के जानकार पत्रकार रंजीत कुमार का भी कहना है कि 15-16 जून को गलवां घाटी में दोनों देशों के सैनिकों की झड़प हुई थी। भारत ने अपने सैन्य बलों की शहादत के आंकड़े जारी कर दिए हैं, लेकिन चीन ने इसे छिपाए रखा है।

कुमार का कहना है कि यह तो संभव नहीं है कि सैन्य झड़प हो और इसमें नुकसान केवल भारतीय सेना का हो। निश्चित रूप से चीन इस झड़प में अपने सैनिकों की शर्मनाक स्थिति पर पर्दा डाल रहा है। स्पांगुर लेक और स्पांगुर गैप में यह दूसरा सैन्य आपरेशन है, जहां चीन के सैनिकों की चुस्ती, फुर्ती, घुसपैठ की कोशिश, तकनीक और संसाधन का सहारा सबकुछ धरा का धरा रह गया।

जाहिर इसका उनके सैन्य मनोबल पर असर पड़ेगा। एक राजनयिक सूत्र का कहना है कि दुनिया के देशों को यह बताने की जरूरत नहीं है कि चीनी सैनिकों ने घुसपैठ का प्रयास किया। चीन अपने सभी पड़ोसियों के साथ ऐसा करता रहता है। अच्छी बात यह है कि भारतीय सैन्य बलों ने उसके प्रयास को विफल कर दिया है।

सैन्य तैयारी पूरी है

चीन के समानांतर भारत ने भी लद्दाख क्षेत्र में पूरी सैन्य तैयारी की है। यह सैन्य तैयारी चीन की चुनौतियों के समानांतर अरुणाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर से सटे सीमा क्षेत्र हिमाचल और उत्तराखंड में जारी है। ताकि चीन की घुसपैठ की चाल से पछताना न पड़े।

सूत्र बताते हैं कि उत्तराखंड के बाराहोती से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक उच्चस्तर की सतर्कता बरती जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस पूरे अभियान में सीडीएस जनरल विपिन रावत और तीनों सेनाध्यक्षों के बीच बेहतर तालमेल को प्रमुखता दी जा रही है। ताकि चीन की सीमा क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियों का माकूल जवाब दिया जा सके।
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सैन्य, कूटनीतिक प्रयास चलते रहेंगे

सेना ने चीन के साथ लद्दाख क्षेत्र में मुद्दे के समाधान के लिए सैन्य और कूटनीतिक प्रयास चलता रहेगा। भारत और चीन का वर्किंग ग्रुप अपना काम करता जा रहा है। समझा जा रहा है कि जल्द ही दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधि (एनएसए अजीत डोभाल और स्टेट काउंसलर वांग यी) के बीच में वर्चुल मीटिंग या टेलीफोनिक चर्चा हो सकती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मास्को से आने के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर के एससीओ में विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने का एजेंडा तय हो सकेगा। विदेश मंत्री एस जयशंकर का 10 सितंबर को मास्को का दौरा प्रस्तावित है। वहां उनकी मुलाकात विदेश मंत्री वांग यी से संभव है।
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