केंद्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर आलोक वर्मा को अक्तूबर 2018 में पहली बार आधिकारिक तौर पर सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2019 में उन्हें बहाल कर दिया था। उसके दो दिन बाद, उच्चस्तरीय चयन कमेटी ने उन्हें हटा दिया। इस कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे। इतना ही नहीं, आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाकर महानिदेशक 'दमकल सेवा' बना दिया गया। वर्मा ने यह जिम्मेदारी संभालने से मना कर दिया। उन्होंने सरकार को अपना इस्तीफा भेज दिया।
वर्मा ने डीओपीटी सचिव को भेजे अपने त्याग-पत्र में कहा, यह 'सामूहिक आत्ममंथन' का क्षण है। यह भी गौर किया जाए कि पत्र के नीचे हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति 31 जुलाई 2017 को रिटायर हो चुका था। उसने 31 जनवरी 2019 तक सीबीआई निदेशक के तौर पर अपनी सेवाएं दीं। इसकी वजह, सीबीआई निदेशक का पद तय कार्यकाल वाली भूमिका के दायरे में आता है। हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति अब सीबीआई निदेशक नहीं है। ऐसे में वह महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद के लिहाज से पहले ही रिटायरमेंट की आयु पार कर चुका है। पूर्व आईपीएस कहते हैं, वर्मा का महानिदेशक दमकल सेवा पद पर ज्वाइन न करने का निर्णय बिल्कुल सही था। सीबीआई निदेशक पद पर जिस दिन उनकी नौकरी खत्म हुई, उसी दिन उनका पद खत्म हो जाता है। केंद्रीय जांच एजेंसी के निदेशक का कार्यकाल दो साल का होता है, उसके बाद सरकार कहे तो भी वर्मा को किसी दूसरे पद पर ज्वाइन नहीं करना चाहिए था, क्योंकि उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है। कोर्ट में सरकार का इस प्वाइंट पर घिरना तय है।
केरल के डीजीपी रहे पूर्व आईपीएस ने बताया, अगर सरकार वाकई ही आलोक वर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है तो यह केस अदालत में जाएगा। पेंशन पर रोक लगाना इतना आसान नही है। सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन के मामलों में 12 फैसले दिए हैं। इनमें दो तो संवैधानिक बैंच के फैसले हैं। इनमें कहा गया है कि पेंशन देने का मतलब, सरकार का कोई अहसान नहीं है। यह किसी भी कार्मिक का अधिकार है। इसका किसी मामले से कोई लिंक नहीं होता। इसे संबंधित कर्मी के सेवाकाल से जोड़ा जाता है। उसने दशकों तक सरकार को अपनी सेवाएं दी हैं, इसलिए उसे पेंशन दी जा रही है। पेंशन भी एक तरह से वेतन की तरह ही होती है। इसे 'डेफर्ड पेमेंट ऑफ सेलरी' कहा गया है।
मौजूदा मामले में सरकार, वर्मा की उस बात से आहत है कि उन्होंने महानिदेशक दमकल के पद पर ज्वाइन क्यों नहीं किया। वर्मा के जीपीएफ व अन्य लाभों पर रोक लगाई गई। उनके ज्वाइन न करने के कदम को सरकार ने अकारण अवकाश माना था। इसे सरकारी सेवा के नियमों का उल्लंघन माना गया। वर्मा के सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और अन्य सेवानिवृत्ति के लाभों पर केंद्र सरकार ने 11 जनवरी से 31 जनवरी 2019 के बीच अकारण छुट्टी पर जाने के बाद रोक लगा दी। वर्मा ने सरकार के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने लिखा, मुझे सेवानिवृत्त माना जाए, क्योंकि मैं 31 जुलाई, 2017 को 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हूं। उनकी इस दलील को सरकार ने स्वीकार नहीं किया और उसे अनुशासनहीनता के दायरे में शामिल कर दिया।