महाराष्ट्र, केरल में लगातार बिगड़ते हालात के चलते देश में अभी भी कोरोना के मामलों की संख्या 40 से 50 हजार मरीजों के बीच बनी हुई है। कोरोना के मामलों को कंट्रोल करने और दिशानिर्देश देने वाली कमेटियों के विशेषज्ञों के मुताबिक दोनों राज्यों में बहुत ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। इस टीम के सदस्य डॉ एनके अरोड़ा कहते हैं कि सबसे ज्यादा जरूरत महाराष्ट्र में है। डॉक्टर अरोड़ा के मुताबिक जब पूरे देश में कोरोना के मामले अप्रैल और मई के महीने में चरम पर थे, तो महाराष्ट्र में भी कमोबेश हालात कुछ वैसे ही थे। लेकिन देश के दूसरे ज्यादा आबादी वाले प्रदेशों में अब कोरोना संक्रमण न के बराबर है लेकिन महाराष्ट्र में अभी भी हालात बेहतर नहीं हुए हैं। इसलिए इस राज्य की बहुत ज्यादा निगरानी मॉनिटर करने की आवश्यकता है। डॉक्टर अरोड़ा कहते हैं इसी वजह से अब महाराष्ट्र और केरल में केंद्र सरकार की रेगुलर मॉनिटरिंग होगी, जिससे न सिर्फ केस कम होंगे बल्कि हालात भी बेहतर हो सकेंगे।
पूरे देश में सोमवार को 40 हजार से ज्यादा मामले कोरोना के सामने आए। इसमें से पचास फीसदी मामले सिर्फ केरल से हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में जितने मामले अभी तक सामने आ रहे हैं वह सभी डेल्टा वेरिएंट के ही हैं। चूंकि अप्रैल और मई के महीने में जब पूरे देश में डेल्टा वैरिएंट के मामले चरम पर थे, तो केरल में ये मामले उस अनुपात में नहीं बढ़ रहे थे। अब केरल में डेल्टा वैरिएंट का प्रसार हुआ है और नतीजतन वहां पर मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को मिले केरल और महाराष्ट्र के आंकड़ों से पता चलता है कि केरल में संक्रमण से होने वाली मौत का प्रतिशत न सिर्फ कम हुआ है बल्कि उस पर बहुत हद तक कंट्रोल भी किया गया है। लेकिन महाराष्ट्र में मौतों को लेकर अभी भी वही हालात हैं जो बीते सप्ताह थे।