केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा कि राज्य के मुख्य सचिव सीताराम कुंते और डीजीपी संजय पांडे के खिलाफ जारी समन को निरस्त कराने के लिए महाराष्ट्र सरकार की तरफ से जो याचिका अदालत में दायर की गई थी, उसके पीछे असली हीरो अनिल देशमुख थे।
सीबीआई फिलहाल अनिल देशमुख पर लगे भ्रष्टाचार और वसूली के आरोपों की जांच कर रही है। जांच एजेंसी की तरफ से अदालत में पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कोर्ट में यह बात कही।
अमन लेखी ने जस्टिस नितिन जामदार और एसवी कोटवाल की पीठ से कहा कि कुंते और संजय पांडे को जारी किये समन के खिलाफ जो याचिका दायर की गई थी दरअसल वो एजेंसी की जांच को भटकाने की एक कोशिश थी।
लेखी ने अदालत से कहा कि सीबीआई ने इस बात के सबूत जुटा लिए थे कि जब देशमुख राज्य के गृहमंत्री थे तब महाराष्ट्र पुलिस स्थापना बोर्ड की तरफ से ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए की गई कई सिफारिशों को रद्द कर दिया गया था।
लेखी ने कहा, हमने यह दिखाने के लिए कई सुबूत जुटाए हैं जिससे पता चलता है कि बोर्ड से आई कई सिफारिशों को मंजूर नहीं किया था, कई फैसलों को बदला गया और कई ट्रांसफर-पोस्टिंग बिना बोर्ड की जानकारी में किए गए। महाराष्ट्र सरकार ने हालांकि समन को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया है। अदालत में इस पर 24 नवंबर को सुनवाई होगी।