केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने संवेदनशील पनडुब्बी रेट्रो फिटिंग (उत्पादन के बाद पुर्जा जोड़ने की) परियोजना से जुड़ी सूचना लीक करने के मामले में गिरफ्तार दो सेवारत नौसेना अधिकारियों समेत छह के खिलाफ मंगलवार को अपना पहला आरोपपत्र दाखिल किया। एजेंसी ने भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक साजिश के आरोप में दो कमांडरों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। रक्षा क्षेत्र से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में जांच एजेंसी की ओर से यह अब तक की सबसे तेज कार्रवाइयों में से एक हैं।
एजेंसी ने मामले में 3 सितंबर को हुई पहली गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर ही आरोपपत्र दाखिल कर दिया। सीबीआई द्वारा राउज एवेन्यू कोर्ट में विशेष सीबीआई न्यायाधीश के समक्ष दाखिल आरोपपत्र में अजित कुमार पांडेय, कमोडोर रैंक का एक सेवानिवृत्त अधिकारी रणदीप सिंह, कमांडर रैंक का एक अन्य सेवानिवृत्त अधिकारी एस जे सिंह, जो एक कोरियाई सबमरीन कंपनी के लिए कार्यरत था, एक निजी कंपनी का निदेशक और एक कथित हवाला ऑपरेटर शामिल है।
सीबीआई ने गिरफ्तार सेवानिवृत्त अधिकारियों में से एक घर से छापेमारी के दौरान 2 करोड़ रुपये बरामद करने का दावा भी किया था। आरोप है कि सेवारत नौसैनिक अधिकारी कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले सेवानिवृत्त अधिकारियों को गोपनीय जानकारी लीक कर रहे थे। सूत्रों ने कहा कि आगे की जांच जारी है और कुछ विदेशी नागरिकों की भूमिका जांच के दायरे में है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील और हाई प्रोफाइल भ्रष्टाचार के मामलों को देखने वाली एजेंसी की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई को सूचना लीक होने का पता लगाने का काम सौंपा गया था, जिसके बाद अभियान शुरू किया गया था।