सीबीआई ने वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) के पूर्व निदेशक राकेश कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। राकेश कुमार समेत पांच वैज्ञानिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सभी पर भ्रष्टाचार और कई निजी कंपनियों को अपने फायदे के लिए लाभ पहुंचाने के आरोप हैं। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि इन सभी पर निजी कंपनियों को हवा शुद्ध करने वाली योजना वायु (WAYU) और कुछ अन्य योजनाओं को तोहफे में देने का आरोप है।
सीबीआई के 17 ठिकानों पर छापेमारी
बुधवार को सीबीआई अधिकारियों ने महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और दिल्ली में 17 अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई को अंजाम दिया। इस दौरान दस्तावेजों, जमीन से जुड़े दस्तावेजों और आभूषणों को जब्त किया गया। सीबीआई का कहना है कि एजेंसी को सीएसआईआर के मुख्य सतर्कता अधिकारी की तरफ से आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार की शिकायत मिली थी। यह शिकायत एनआआआरई के पूर्व निदेशक राकेश कुमार, मुख्य वैज्ञानिक आत्या कापले, संजीव कुमार गोयल, प्रधान वैज्ञानिक रितेश विजय और वरिष्ठ वैज्ञानिक सुनील गुलिया के खिलाफ मिली थी।
भ्रष्टाचार और अनियमितता के आरोप
तीन एफआईआर में से एक में सीबीआई ने गुलिया और गोयल के साथ-साथ एसएस एनवायरमेंट कंसल्टेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (ईईसीपीएल) और अलकनंदा टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड (एटीपीएल) पर मामला दर्ज किया है। इन पर वायु-2 (WAYU-2) के उपकरणों को स्थापित करने में भ्रष्टाचार का आरोप है। हवा को शुद्ध करने वाले उपकरण ‘वायु’ को एनईईआरआई द्वारा तैयार किया गया था। सीबीआई के प्रवक्ता ने कहा, ‘गुलिया और गोयल पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन्होंने निजी कंपनियों से फायदा हासिल करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया। इस तरह से ‘वायु के दूसरे उपकरण की की खरीद, निर्माण और स्थापना में घोर अनियमितताएं कीं।’
अपने फायदे के लिए रेवड़ी की तरह बांटे प्रोजक्ट
दूसरी एफआईआर में एनईईआरई के पूर्व निदेशक राकेश कुमार और आत्या कापले का नाम शामिल है। आरोप है कि इन दोनों ने भी अपने निजी स्वार्थ के लिए अलग अलग कंपनियों को रेवड़ी की तरह ये प्रोजक्ट तोहफे में बांट दिए। इसके अलावा तीसरी एफआईआर में राकेश कुमार के साथ साथ रितेश विजय का नाम भी शामिल है।