जाकिर नगर, दिल्ली निवासी याची काजिम अहमद (62) ने दावा किया है कि नोएडा में कथित घृणा अपराध के मामले में उन्हें अपशब्द कहा गया और उनका उत्पीड़न किया गया। याचिका में जिला गौतमबुद्धनगर के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के पहले के एक निर्देश के मुताबिक एहतियाती और उपचारात्मक उपाय करने में कथित तौर पर विफल रहने के लिए विभागीय या दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की गई है।
नोएडा में इस वर्ष जुलाई में हुए एक कथित घृणा अपराध के मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। जाकिर नगर, दिल्ली निवासी याची काजिम अहमद (62) ने दावा किया है कि नोएडा में कथित घृणा अपराध के मामले में उन्हें अपशब्द कहा गया और उनका उत्पीड़न किया गया।
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याचिका में जिला गौतमबुद्धनगर के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के पहले के एक निर्देश के मुताबिक एहतियाती और उपचारात्मक उपाय करने में कथित तौर पर विफल रहने के लिए विभागीय या दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने की भी मांग की गई है। जस्टिस एएम. खानविलकर और जस्टिस सीटी. रविकुमार की पीठ के समक्ष शुक्रवार को याचिका सुनवाई के लिए आई। पीठ ने कहा कि नफरत भरे भाषण के मुद्दे पर लंबित अन्य याचिकाओं के साथ ही इस मामले पर सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दे दी कि याचिका की प्रति उत्तर प्रदेश सरकार के वकील एवं अन्य प्रतिवादियों को दें। याचिका में दावा किया गया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के साथ ही संबंधित पुलिस अधिकारियों को कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ‘उनकी दाढ़ी और मुस्लिम पहचान’ के कारण उन पर हमला किया गया।
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दाढ़ी व पहनावे पर टिप्पणी का आरोप
काजिम 4 जुलाई को एक रिश्तेदार के यहां शादी में अलीगढ़ जा रहे थे। इसके लिए वह दिल्ली से नोएडा सेक्टर-37 बस स्टैंड पर पहुंचकर बस का इंतजार कर रहे थे। कार सवार युवकों ने अलीगढ़ जाने के लिए उन्हें लिफ्ट दी और मारपीट कर 1200 रुपये लूट लिए। आरोप था कि इस दौरान कार सवार युवकों ने काजिम की मुस्लिम पहचान देखकर गाली-गलौज करते हुए दाढ़ी व पहनावे को लेकर धर्म विरोधी टिप्पणी भी की।