याचिका में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के एक पूर्व अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर सह-आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी को फंसाने और अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी।
मुंबई की एक विशेष एनआईए कोर्ट ने कहा है कि 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में एक आरोपी के आवास पर विस्फोटक रखे जाने के आरोप पर सुनवाई के बीच में फैसला नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने आरोपी समीर कुलकर्णी के एक आवेदन का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की।
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याचिका में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) के एक पूर्व अधिकारी के खिलाफ कथित तौर पर सह-आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी को फंसाने और अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी। चतुर्वेदी घटना के समय एटीएस टीम का हिस्सा थे। उन्होंने शुरुआत में मामले की जांच की थी।
आरोप है कि उन्होंने लगभग 14 साल पुराने इस मामले में घर पर विस्फोटक रखकर कुलकर्णी को झूठे तौर पर फंसाया था। याचिका के जरिए कुलकर्णी ने चतुर्वेदी को फंसाने और अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने के लिए कार्रवाई की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका का निपटारा एक अगस्त को किया था, लेकिन विस्तृत आदेश गुरुवार को उपलब्ध हुआ।