मतुआ बहुल बोंगांव निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने कहा, "सीएए के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हम अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए कुछ जटिलताओं को सुलझाने की प्रक्रिया में हैं। आपको चिंतित होने की जरूरत नहीं है। आप पहले से ही भारत के नागरिक हैं। किसी की हिम्मत नहीं है जो आपके खिलाफ कार्रवाई कर सके।"
उल्लेखनीय है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले मिश्रा की घोषणा को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मतुआ समुदाय ने संसद में पारित होने के चार साल बाद भी नागरिकता अधिनियम लागू न होने के मुद्दे पर हाल के दिनों में असंतोष जताया था। इतना ही नहीं, केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर भी कई बार खुद इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब केंद्रीय मंत्री के बयान के बाद भाजपा के खेमे ने थोड़ी राहत की सांस ली है। क्योंकि हिंदू शरणार्थी दक्षिण बंगाल के कई इलाकों में काफी दबदबा रखते हैं।
बंगाल भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय मंत्री के दावे का समर्थन करते हुए कहा, सीएए का क्रियान्वयन एक बड़ा काम है। इसे सही समय पर लागू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री की घोषणा पर तंज कसते हुए टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा, ''यह लोकसभा चुनाव से पहले एक राजनीतिक नौटंकी के अलावा और कुछ नहीं है। भाजपा बेनकाब हो गई है और मतुआओं को एहसास हो गया है कि उन्हें भाजपा के झूठे वादे से धोखा दिया गया है। इस बार उन्हें समुदाय का समर्थन नहीं मिलने वाला है।"