मवेशियों की खरीद फरोख्त संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर विवाद के बीच भैंसे को इसके दायरे से बाहर निकालने पर करीब करीब सहमति बन गई है।
नए नियम पर उपजे देशव्यापी विवाद के बाद पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे डा हर्षवर्धन की बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ ढाई घंटे की मैराथन बैठक हुई। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश वापसी के बाद अधिसूचना के कुछ प्रावधानों में बदलाव लाने पर विस्तृत विचार विमर्श होगा।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अधिसूचना की भाषा स्पष्ट न होना भी विवाद की वजह बनी है। इसके जरिए सरकार की मंशा गोवंश (गाय, बैल बछड़ा) को कत्लखाना जाने से बचाने की थी।
मगर अधिसूचना की भाषा यह भी संदेश देती है कि भविष्य में भैंस, भैंसे, ऊंट जैसे जानवरों की खरीद-बिक्री के लिए भी यह सुनिश्चित करना होगा इसे कत्ल के लिए खरीदा-बेचा नहीं जा रहा। यही कारण है कि बृहस्पतिवार की बैठक में भैंस, भैंसे, ऊंट जैसे जानवरों को अधिसूचना के बाहर रखने पर लगभग सहमति बन गई।
दरअसल अधिसूचना पर विवाद गहराने के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को इसकी समीक्षा की थी। इसके बाद हर्षवर्धन के जर्मनी से स्वदेश लौटते ही पीएमओ के अधिकारियों ने उनके साथ लंबी बैठक की।
फिलहाल अधिसूचना के प्रावधानों में बदलाव को ले कर पीएमओ ने नोट्स तैयार कर लिया है। अब प्रधानमंत्री के स्वदेश लौटने के बाद पीएमओ केअधिकारी उनके साथ इस विषय पर चर्चा करेंगे।