कोरोनावायरस महामारी के दौरान क्यों उठी मानसिक स्वास्थ्य की चिंता?
- हालिया समय में ऐसी कई स्टडीज सामने आ चुकी हैं, जिनमें दावा किया गया है कि कोरोनावायरस महामारी के चलते लोगों की मानसिक सेहत पर भी असर पड़ने लगा है। खासकर उन लोगों पर जो कोरोनावायरस संक्रमण से उबरे हैं।
- महामारी के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने डिप्रेशन और तनाव में रहने की शिकायत की है। इसके अलावा कोरोना से उबर चुके कई मरीजों को लॉन्ग कोविड से प्रभावित भी पाया गया। इस स्थिति में मरीजों ने दिमागी तौर पर धुंधलेपन का शिकार होने की शिकायत की। यानी कोरोना से उबरने के बाद उन्हें इसके लक्षण दिखते रहे और उनकी सोचने-समझने की क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा।
- इसके अलावा लॉकडाउन और प्रतिबंधों के बीच रहने की वजह से भी लोगों ने मानसिक तौर पर परेशान होने की शिकायत की। कुछ अन्य लोगों ने भी कोरोना महामारी के दौरान मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझने की बात कही है।
भारत में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने की क्या है कीमत?
- अगर कोरोनावायरस महामारी के इस कठिन समय को अलग भी कर दें तो भारत को मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देने की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, 2012 से 2030 के बीच लोगों में पैदा हो रही मानसिक समस्याओं की वजह से भारत को 77 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
- भारत में महामारी के आने से पहले भी करीब 5 करोड़ बच्चे मानसिक स्वास्थ्य की परेशानियों से जूझ रहे थे। इनमें से 80-90 फीसदी ने समस्या खत्म करने के लिए कोई मदद नहीं ली। यानी भारत की अगली पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा मानसिक समस्याओं के इलाज के बिना ही रहने को मजबूर है।
- केंद्र सरकार ने दिसंबर 2021 में राज्यसभा में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किए गए एक सवाल पर कहा था भारत में करीब 10.6 फीसदी वयस्क किसी न किसी तरह के मनोवैज्ञानिक विकार से जूझ रहे थे।
क्या है टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम?
वित्त मंत्री ने एलान किया है कि आईआईआईटी बंगलुरु (IIIT Bengaluru) विशेष टेली-कंसल्टेशन सेवाओं के संचालन के लिए तकनीकी सपोर्ट मुहैया कराएगा। उन्होंने कहा कि महामारी ने सभी उम्र के लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं पैदा की हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श और देखभाल सेवाओं तक बेहतर पहुंच मुहैया कराने के लिए राष्ट्रीय टेली मेंटल हेल्थ कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है।
कैसे लोगों की समस्याओं को किया जाएगा दूर?
NIMHANS के सेंटर फॉर साइकोलॉजिकल सपोर्ट ने महामारी के दौरान एक राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर जारी किया था। इसका मकसद महामारी और लॉकडाउन के दौरान मानसिक और मनोवैज्ञानिक दिक्कतों से जूझ रहे लोगों के लिए परामर्श मुहैया कराना होता था। अब इसी सेवा को नेशनल टेली-मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके तहत सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण मुफ्त मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा ये प्रोग्राम देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में एक बड़े अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कोरोना योद्धाओं की सम्मान निधि हुई कम
सरकार ने कोरोना योद्धाओं की सम्मान निधि से जुड़े बजट में कटौती है। पिछले वर्ष सरकार ने देश भर में कोरोना योद्धाओं को 813.60 करोड़ रुपये की सम्मान निधि दी थी लेकिन इस बार के बजट में 226 करोड़ रुपये खर्च किए जा सकते हैं। दरअसल सरकार ने साल 2020 में फ्रंटलाइन वर्करों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा की थी जिसके तहत कोरोना योद्घा के परिजनों को 50 लाख रुपये तक की सम्मान निधि दी जा रही है। इसके अलावा सरकार ने फ्रंटलाइन वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारियों के टीकाकरण को लेकर भी बजट नहीं दिया है। साल 2020 में यह बजट 136 करोड़ रुपये था।
मेडिकल कॉलेज का विस्तार, एम्स खोलने पर जोर
सरकार ने स्वास्थ्य बजट में मेडिकल कॉलेज के विस्तार और हर राज्य में एक एम्स की स्थापना करने की योजना को भी आगे बढ़ाया है। सरकार ने इसके लिए बजट में तीन हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी भी की है। पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार ने इस योजना प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए सात हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया था जिसे अब बढ़ाकर 10 हजार करोड़ रुपये कर दिया है।