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Budget 2022: साहा बोले- सरकार ने लिया 'किसान आंदोलन' का बदला, इस बार तो घोषणा भी नहीं, केवल सूखा पड़ा है

सार

किसान आंदोलन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चे की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय तौर पर भाग लेने वाले अविक साहा कहते हैं, सरकार ने किसानों से आंदोलन का बदला लिया है। भले ही आंदोलन दिल्ली की सीमाओं से अब उठ चुका है, लेकिन केंद्र सरकार अपने मन में किसानों के प्रति गुस्सा बरकरार रखा है। इसकी बानगी केंद्रीय बजट में देखने को मिली है...
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किसान - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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केंद्र सरकार के बजट में किसानों के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है। उन्हें केवल बरगलाने का प्रयास किया गया है। जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अविक साहा ने बजट पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केंद्र सरकार ने अपने बजट में 'किसान आंदोलन' का बदला लिया है। इससे पहले के बजट में किसानों को कुछ मिले या न मिले, लेकिन उनके लिए अच्छी बातें तो होती थीं। इस बार के बजट में तो कोई घोषणा भी नहीं की गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, रबी और खरीफ फसल का संरक्षण करते हुए किसानों के खातों में 2.37 लाख करोड़ रुपये की एमएसपी ट्रांसफर की जाएगी। सच्चाई यह है कि पिछले साल 2.48 लाख करोड़ रुपये देने की बात कही गई थी, इस बार तो वह राशि घट कर 2.37 लाख करोड़ रुपये हो गई है। बतौर अविक साहा, केंद्र सरकार ने किसानों के साथ मजाक किया है।

सरकार ने किया किसानों को निराश, आंदोलन का 'बदला' लिया?  

किसान आंदोलन के दौरान संयुक्त किसान मोर्चे की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय तौर पर भाग लेने वाले अविक साहा कहते हैं, सरकार ने किसानों से आंदोलन का बदला लिया है। भले ही आंदोलन दिल्ली की सीमाओं से अब उठ चुका है, लेकिन केंद्र सरकार अपने मन में किसानों के प्रति गुस्सा बरकरार रखा है। इसकी बानगी केंद्रीय बजट में देखने को मिली है। हैरानी की बात तो ये है कि इस बार के बजट में किसानों के लिए एक भी अच्छी बात नहीं कही गई। एमएसपी गारंटी को लेकर सरकार मौन है। बजट से पहले सरकार को एमएसपी गारंटी कानून को लेकर कुछ बताना चाहिए था। देशभर के किसानों से आंखें मिलाकर केंद्र सरकार यह कहती कि हम इतने समय में एमएसपी गारंटी कानून बना देंगे।

एमएसपी खरीद तो घट गई है!

साहा ने कहा, धान और गेहूं की फसल पर एमएसपी खरीद तो कम हो गई है। बजट में कहा गया है कि 2.37 लाख करोड़ रुपये की राशि बतौर एमएसपी ट्रांसफर की जाएगी। साहा के मुताबिक, पिछले साल के बजट में यह राशि 2.48 लाख करोड़ रुपये थी। 1.97 करोड़ किसानों को यह राशि मिलने की बात कही गई। इसके तहत 1286 एलएमटी फसल की खरीद हुई थी। इस बार के बजट में वह मात्रा 1208 एलएमटी है। किसानों की संख्या भी घटकर 1.63 करोड़ रह गई है। ऐसे में कैसे कह दें कि बजट में किसानों के हितों की बात हुई है।

किसानों की आय दोगुना तो नहीं हुई: यादव

एसकेएम के वरिष्ठ सदस्य योगेंद्र यादव ने मोदी सरकार से सवाल पूछा कि क्या वे बताएंगे कि छह साल में किसान की आय दोगुनी हो गई? छह साल तो अब पूरे हो रहे हैं। यह मुद्दा हर किसान के जीवन से जुड़ा था। इस बाबत सरकार को खुलकर बोलना चाहिए था। आखिर वह कौन सा तरीका है जिससे किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी। अब ड्रोन के माध्यम से किसानों की खेती का असेसमेंट करेंगे। पहले सेटेलाइट से होता था। इन सब तरीकों से किसानों को कोई फायदा नहीं होने वाला। इस बार न पैसा मिला, न घोषणा हुई। केवल चुप्पी मिली है। साल 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का काम पूरा होना था, बजट में इस पर कुछ लाइनें बोली जातीं। सरकार ने एग्रीकल्चर फंड के खर्च को लेकर चुप्पी साध रखी है। मनरेगा का पैसा नहीं बढ़ाया गया। राज्यों के पास भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है।

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