सीमा सुरक्षा बल 'बीएसएफ' के जांबाजों ने कभी तो श्रीनगर एयरफील्ड पर हुए बड़े आतंकी हमले को नाकाम किया, तो कहीं निहत्था जवान ही उग्रवादियों पर टूट पड़ा। एक बहादुर जवान ने तो गमले से ही 'एके-47' से लैस आतंकी का मुकाबला किया। ऐसी ही वीरता के उदाहरण पेश करने वाले बीएसएफ जवानों को वीरता के लिये पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार को नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर में बीएसएफ के जोशीले प्रहरियों को सम्मान से नवाजा।
16 अक्टूबर 2017 के दिन दीपक कुमार मंडल द्वितीय कमान अधिकारी त्रिपुरा में तैनात थे। वे कार्यकारी कमांडेंट की भूमिका का निर्वहन कर रहे थे। इन्हें सोनामूरा के नजदीक सीमा सुरक्षा बल की गाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिली। वे आरक्षक बी. चंद्रकांत व आरक्षक प्रेम सिंह को लेकर घटनास्थल की ओर रवाना हुए। दीपक कुमार की नजर सीमा चौकी 'बेलारीदप्पा' के निकट गो-तस्करी करने वाले 25-30 संदिग्ध तस्करों पर पड़ी। इन्होने तस्करों को ललकारा। तस्करों ने बेहद उग्र होते हुए दीपक मंडल पर पत्थरों व तेजधार वाले हथियारों से हमला कर दिया। उन पर गाड़ी चढ़ा दी। 20 अक्तूबर को दीपक ने अंतिम सांस लेते हुए सर्वोच्च शहादत दी। उन्हें वर्ष 2020 के गणतंत्र दिवस पर बलिदानोपरांत 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया।
श्रीनगर एयरफील्ड की सुरक्षा की जिम्मेदारी 182 बटालियन को दी गई थी। 03 अक्तूबर 2017 को अल सुबह तीन हथियारबंद आतंकवादियों ने कम ऊंचाई वाली चारदीवारी व कंसर्टिना कॉइल काटकर परिसर में प्रवेश किया। डीआईजी सुरजीत सिंह, सीमांत मुख्यालय कश्मीर में तैनात थे। हमले की सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। आतंकियों की संभावित जगह का पता लगाया। जब वे प्रशासनिक भवन पहुंचे, तो एक आतंकी ने इन्हें लक्षित कर फायरिंग कर दी। जान की परवाह किए गुलेरिया ने आतंकी की पोजिशन का पता लगाया। वहां की घेराबंदी सुनिश्चित की। आतंकी को बाहर निकालने के लिए ग्रेनेड, आंसू गैस और स्मोक बम का इस्तेमाल किया। ईमारत से बाहर निकलकर आतंकी, जब मंदिर की तरफ दौड़ा तो बीएसएफ व एसओजी उसे बेअसर कर दिया। एसएस गुलेरिया को 'वीरता का पुलिस पदक' दिया गया है।
मुख्य आरक्षक श्याम सिंह 03 अक्तूबर 2017 को प्रशासनिक भवन के स्थित सिग्नल सेंटर में तैनात थे। इन्हें लगातार गोलियां चलने की आवाज सुनाई दी। वे जैसे ही सिग्नल सेंटर के बाहर निकले, तभी सामने से आ रहे आतंकी ने इन्हे लक्ष्य कर फायरिंग कर दी। एक गोली इनकी जांघ में लग गई। श्याम सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। पास रखा एक गमला उठाया और उसे आतंकी पर दे मारा। आतंकी असंतुलित हो गया और पहली मंजिल की ओर भाग गया। हथियार विहीन होने के बावजूद मुख्य आरक्षक श्याम सिंह ने पराक्रम और शौर्य का परिचय दिया। इन्हें भी गणतंत्र दिवस पर 'वीरता के लिए पुलिस पदक' से सम्मानित किया गया है।