उन्होंने बताया कि कुछ ऐसे कारण भी हैं जो सबसे पहले तनाव उत्पन्न करते हैं, फिर डिप्रैशन और आखिर में बात आत्महत्या तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे के कारण कमजोर प्रेरणाशक्ति, शराब पर निर्भरता, नींद ना आना, अकेलापन, परिवार के सदस्यों से संबंधित कोई समस्या, काम करने की प्रतिकूल स्थितियां, वित्तिय परेशानी, क्रोध और असाहयता हैं।
इंस्पेक्टर जनरल सतवंत अतवल त्रिवेदी के मुताबिक आत्महत्या बहुत दुखद होती है लेकिन अगर कोई प्रशिक्षित जवान ऐसा करे तो वह राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि जवानों को एक अच्छा वातावरण देने के लिए सभी उपाय किए जाएंगे ताकि वह ऐसा कोई कदम ना उठाएं। अगर परेशानियों का जल्द ही पता लगा लिया जाए और उन पर ध्यान दिया जाए तो हादसों को टाला जा सकता है।
जानकारी के मुताबिक क्षेत्रीय यूनिटों में जल्द ही बुकलेट जारी की जाएंगी ताकि
तनावग्रस्त जवानों की मदद की जा सके। साथ ही ग्रुप गेम, अच्छी डाइट और उचित स्वास्थ्य सेवा पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा यह भी ध्यान दिया जाएगा कि उन्हें गेम खेलने, किताब पढ़ने और फिल्म देखने का समय मिल सके। इसके साथ ही 'घर की बात' जैसे सेशन्स भी आयोजित होंगे ताकि जवान अपनी परेशानियां और अनुभव साझा कर सकें।