फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

K Kavitha: ईडी, नेशनल हेराल्ड केस में जांच क्यों नहीं कर रही है? बीआरएस नेता के कविता ने लगाए गंभीर आरोप

Fri, 15 Sep 2023 10:27 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बीआरएस ने हमेशा कहा है कि ये राष्ट्रीय पार्टियां एक हैं, यही वजह है कि हम इन दोनों पार्टियों से एक हाथ की दूरी रखते हैं।
विज्ञापन
सोनिया गांधी और राहुल गांधी - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीआरएस (भारत राष्ट्र समिति) की एमएलसी के कविता ने शुक्रवार को सवाल किया कि नेशनल हेराल्ड केस पर भाजपा ने चुप्पी क्यों साधी हुई है। के कविता ने आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्ड केस में ईडी की जांच आगे नहीं बढ़ रही है। के कविता ने सवाल किया कि जब नेशनल हेराल्ड केस में कोई स्टे नहीं है तो फिर ईडी कांग्रेस नेताओं से पूछताछ क्यों नहीं कर रही है? बीआरएस नेता ने आरोप लगाया और कहा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मामले में मौन सहमति है। 
विज्ञापन


'दोनों राष्ट्रीय पार्टियां एक'
बीआरएस नेता ने कहा कि 'मैं देश के लोगों को एक मुद्दे का ध्यान दिलाना चाहती हूं। राहुल गांधी जी, सोनिया गांधी जी और उनके शीर्ष नेतृत्व से ईडी ने करीब डेढ़ साल पहले 5000 करोड़ रुपये के नेशनल हेराल्ड केस में पूछताछ की थी। लेकिन उसके बाद ईडी ने इस मामले में आगे कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या भाजपा और कांग्रेस के बीच इसे लेकर कोई बातचीत हो गई है? बीआरएस ने हमेशा कहा है कि ये राष्ट्रीय पार्टियां एक हैं, यही वजह है कि हम इन दोनों पार्टियों से एक हाथ की दूरी रखते हैं।'

'पीएमएलए कानून में सुधार की लड़ाई लड़ रही'
के कविता ने कहा कि मैं कोर्ट में पीएमएलए कानून में सुधार के लिए लड़ रही हूं, लेकिन राहुल जी क्या कर रहे हैं? के कविता की मांग है कि सीआरपीसी की धारा 160, पीएमएलए (धन शोधन रोकथाम कानून) के मामलों में भी लागू होनी चाहिए। बता दें कि सीआरपीसी की धारा 160 के तहत महिलाओं को समन जारी कर पुलिस थाने पूछताछ के लिए नहीं बुलाया जा सकता। के कविता से दिल्ली शराब नीति मामले में ईडी द्वारा पूछताछ की जा रही है। महिलाओं को संसद में आरक्षण देने के मामले पर के कविता ने कहा कि हम पहले विधानसभा सत्र से ही इस मामले को उठा रहे हैं कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास होना चाहिए। संसद के आगामी विशेष सत्र में भी हम इस मामले को उठाएंगे। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें