टिकट की कालाबाजारी करने वाले आरोपियों के तार कोलकाता, बंगलूरू, लखनऊ, मुंबई, अहमदाबाद, शिलांग और जोधपुर से जुड़े हुए है। आरपीएफ ने इन जगहों से 59 दलालों को गिरफ्त में लिया है।
आईआरसीटीसी के एजेंट भी करते है गोरखधंधा
साफ्टवेयर के माध्यम से ना केवल आतंकवादी संगठन से जुड़े लोग बल्कि आईआरसीटीसी के एजेंट भी इस गोरखधंधा में संलिप्त पाए गए। रेलवे पुलिस ने अधिकारिक तौर पर बताया कि 420 अधिकृत एजेंड को पकड़ा गया है जो अवैध साफ्टवेयर से टिकटों की बुकिंग करते थे। 11 फरवरी से 12 फरवरी के बीच दो दिनों के ड्राइव में 319 एजेंट को गिरफ्तार किया गया इनमें 3 एजेंट ने स्वीकारा कि वह अवैध साफ्टवेयर से टिकटों की बुकिंग करते थे।
पाकिस्तान जिंदाबाद वाट्सएप ग्रुप से भी जुड़े है टिकट के दलाल
टिकटों की कालाबाजारी करने वाले कई आरोपी पाकिस्तान जिंदाबाद वाट्सएप ग्रुप से भी जुड़े होने के सबूत रेलवे पुलिस को मिला है। प्रियाजीत जिसे शिलांग से गिरफ्तार किया गया है वह इस ग्रुप से जुड़ा है। इसके अलावा रौशन उर्फ दिनेश जांघी जो साफ्टवेयर डेवलॉपर थे इन्हें भी गिरफ्तार किया गया है। तीनों शमशेर नाम के दलाल के संपर्क में थे। तकनीकी रूप से इतने दक्ष थे कि क्लाउड को ही कंट्रोल कर लेते थे।
रेलवे पुलिस ने दावा किया है कि इस मुहिम से अब लोगों को आसानी से तत्काल टिकट मिल रहा है। मगध, संपूर्ण क्रांति व स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के लिए तत्काल का काउंटर खुलते ही एक मिनट के भीतर सभी टिकट बुक हो जाते थे, लेकिन अब घंटों तक तत्काल कोटा फुल नहीं होता और आम लोगों को आसानी से तत्काल कोटे के तहत यात्रा टिकट मिल रहा है।
आम तौर पर टिकट बुकिंग की पूरी प्रक्रिया में तीन मिनट तक का समय लगता है। लेकिन इस गिरोह ने ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार किया था जिससे एक मिनट में तीन टिकट बुक हो जाते हैं। यानी कई यात्रियों के टिकट एक मिनट में ही बुक होते थे जिसके वजह से तत्काल टिकट काउंटर पर एक से चार मिनट के भीतर ही सभी टिकट बुक होने की बात बता कर लाइन में लगे लोगों को वेटिंग टिकट दिया जाने लगता था।