भारत में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। दिल्ली के भारत मंडपम में 12-13 सितंबर को होने वाले आयोजन में दुनियाभर के कई अहम देश एक साथ, एक छत के नीचे विश्व को प्रभावित कर रहे मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बता दें कि ब्रिक्स 2026 एडिशन की अध्यक्षता भारत के पास है। इसलिए कार्यक्रम की थीम भी भारत की तरफ से ही तय की गई है। इस बार ब्रिक्स जिन मुद्दों को केंद्रित कर के चर्चा करेगा, वह है- 'बिल्डिंग फॉर रेजिलियंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी' (ब्रिक्स)। इसका मतलब है कि ब्रिक्स की चर्चा मुख्यतः देशों के बीच लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के निर्माण पर होगी।
आइये जानते हैं कि ब्रिक्स क्या है? इस गठबंधन की दुनिया में अहमियत क्या है? भारत के लिए ब्रिक्स क्यों अहम है? इसमें शामिल देशों की तुलना क्या है? इस बार सम्मेलन में किन अहम मुद्दों पर चर्चा होना तय है यानी इस बार का एजेंडा क्या रहेगा? साथ ही ब्रिक्स में हिस्सा लेने के लिए कौन-कौन से देश और कौन राष्ट्रप्रमुख भारत आ सकते हैं? आइये जानते हैं...
ब्रिक्स का इतिहास।
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ब्रिक्स की ताकत।
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ब्रिक्स का मकसद।
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ब्रिक्स सम्मेलन 2026 के मुद्दे।
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ब्रिक्स में दो देशों के बीच हो सकता है टकराव।
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ब्रिक्स के भारत में आयोजन का इतिहास।
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भारत के लिए ब्रिक्स क्यों अहम?
- बीते कुछ वर्षों में ब्रिक्स एक आर्थिक समूह से ऊपर उठकर एक बड़ा मंच बन चुका है, जहां से मौजूदा समय में दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व हो रहा है। ऐसे में ब्रिक्स का मंच विकासशील देशों की आवाज माना जाता है और भारत वैश्विक दक्षिण का बड़ा पक्षकार। खासकर वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर।
- भारत के लिए ब्रिक्स रूस और चीन के साथ जुड़ने का एक अहम मंच है। अमेरिका, यूरोप, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों से संबंधों को मजबूत करते हुए यह मंच भारत को अपने पारंपरिक सहयोगी रूस और पड़ोसी चीन के साथ जुड़ने का मौका देता है।
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- इतना ही नहीं, भारत इस मंच से उन देशों की भी आवाज उठाने का जरिया बनता है, जिन्हें महाशक्तियों के बीच कम तवज्जो मिलती है या जो देश अमेरिका और रूस-चीन के ध्रुव से अलग रह कर गुट निरपेक्ष रहने को प्राथमिकता देते हैं।
- भारत के लिए ब्रिक्स की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि यह संगठन लगातार वैश्विक संस्थाओं, जैसे- संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक, आईएमएम में सुधार की मांग करता रहा है और विकासशील देशों को उनका हक देने की बात भी उठाता रहा है। भारत भी इन वैश्विक संगठनों में ऐसी ही सुधार का पक्षधर रहा है।
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ब्रिक्स सम्मेलन 2026 में भारत की होगी बड़ी भूमिका।
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ब्रिक्स में हिस्सा लेने कौन-कौन भारत आ सकता है?
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की संभावना है। हालांकि, चीन की तरफ से आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अब तक नहीं हुई है। अगर वे आते हैं तो यह 2019 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। आखिरी बार वे एक अनाधिकारिक सम्मेलन के लिए मामल्लपुरम पहुंचे थे। अगर शी आते हैं तो उनके और पीएम मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता तय होगी।
- रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स में हिस्सा लेने भारत आएंगे। यह एक साल के अंदर उनकी दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले दिसंबर 2025 में पुतिन ने वार्षिक द्विपक्षीय सम्मेलन के लिए दिल्ली का दौरा किया था। मोदी ने इस बार बिश्केक में एससीओ सम्मेलन के दौरान निजी तौर पर पुतिन को ब्रिक्स के लिए भारत आने का न्योता दिया था।
- इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद, बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाखस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्त तोकाएव, मलयेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम और थाईलैंड के पीएम अनुतिन चर्णविराकुल ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुतारेस के भी आने के कयास हैं। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है।