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बीएसएफ के पूर्व डीजी प्रकाश और उनके बेटे व मौजूदा डीजी पंकज सिंह के बीच ऐसी रही जुगलबंदी, पढ़िए आईपीएस 'पिता-पुत्र' की कहानी

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जितेंद्र भारद्वाज Updated Thu, 26 Aug 2021 10:48 AM IST

सार

बीएसएफ के पूर्व डीजी रहे प्रकाश सिंह ने गुरुवार सुबह अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत की है। उन्होंने अपने बेटे पंकज सिंह, जो अब बीएसएफ के डीजी बनें हैं, के साथ आपसी जुगलबंदी को लेकर कुछ यादें साझा की हैं। 
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बीएसएफ के डीजी नियुक्त किए गए पंकज सिंह (दाएं) के पिता प्रकाश सिंह भी इसी बल में डीजी का पद संभाल चुके हैं। - फोटो : Social Media


प्रकाश सिंह ने कहा, ये इत्तेफाक ही है कि आज बेटे पंकज सिंह, 'सीमा सुरक्षा बल' के महानिदेशक बने हैं। उनकी इच्छा थी कि वे केंद्रीय स्तर किसी फोर्स में काम करें। वैसे आईपीएस में उनका राजस्थान कैडर रहा है। इससे पहले वे सीआरपीएफ में आईजी 'ऑपरेशन' के पद पर भी काम कर चुके हैं। जब पंकज सिंह का आईपीएस के लिए चयन हुआ तो घर में एक बार फिर से खुशी का माहौल बन गया। अब मैं 'बिना बात किए तुमने फैसला कर लिया' संवाद को आगे बढ़ाता हूं। मैने कई सवाल पूछ लिए। पंकज, मेरे सारे सवालों को गौर से सुन रहे थे। उन्होंने कुछ जवाब भी दिए। अंत में पंकज सिंह ने एक जवाब देकर बात खत्म कर दी। वह जवाब कुछ यूं रहा। पापा 'आपको आईपीएस में देखा है।'

 

उस वक्त मेरे बड़े भाई आरपी सिंह, रेलवे बोर्ड के सदस्य होते थे। मैने पंकज से कहा, अरे कम से कम बड़े पापा से ही बात कर लेते। वे बता देते कि रेलवे की नौकरी कैसी होती है। पंकज ने कहा, हमने देखा है कि डीआरएम जैसे पद पर बैठे कमरे में कोई भी यूनियन का नेता आता है और उसे डांटकर चला जाता है। मैने यह भी देखा है कि लोग 'प्रकाश सिंह' के कमरे में घुसने से डरते हैं। उनके कमरे के बाहर खड़े होने का मतलब है कि वह अधिकारी या कर्मचारी अपने कार्य के प्रति पूर्ण रूप से अपडेट रहे। वो इसलिए, क्योंकि कमरे के भीतर जाते ही काम ही पूछा जाएगा। मेरे पापा की नौकरी शानदार रही है। इसी वजह से पंकज ने केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए लिख दिया था। वे केंद्रीय बलों में कुछ खास करना चाहते हैं। 


क्या आप बीएसएफ डीजी पंकज कुमार सिंह को सलाह देंगे, प्रकाश सिंह ने इस सवाल का जवाब कुछ इस अंदाज में दिया। हमें तो बीएसएफ में काम करने के सात ही महीने मिल पाए थे। मुझे इस बात का मलाल था कि कार्यकाल बहुत छोटा रहा। उससे पहले असम और यूपी पुलिस के डीजीपी रह चुके थे। अब बेटे पंकज सिंह के पास एक साल चार माह का समय है। वे इसमें बहुत कुछ कर सकते हैं। खैर जब लड़का बड़ा हो जाए तो ज्यादा सलाह नहीं देनी चाहिए। वे पूछेंगे तो हम कोई सलाह दे देंगे। प्रकाश सिंह ने हंसते हुए कहा, बच्चे अब बड़े हो गए हैं। वे सही और गलत का फर्क समझते हैं। उम्मीद है कि पंकज कुमार सिंह अच्छा करेंगे। 
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