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दुर्भाग्य : आजादी के 75 साल बाद भी पानी के लिए लोग खटखटा रहे हैं कोर्ट का दरवाजा

Thu, 09 Sep 2021 06:26 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट से जल वितरण कंपनी एसटीईएम को रोजाना पानी की आपूर्ति करने के निर्देश देने की गुहार लगाई। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि अभी उन्हें महीने में केवल दो बार ही पानी मिल रहा है।
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WATER CRISIS - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि नियमित पेयजल आपूर्ति एक मौलिक अधिकार है लेकिन यह दुर्भाग्य है कि लोगों को आजादी के 75 साल बाद भी इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है। यह सख्त टिप्पणी बुधवार को जस्टिस एसजे कथावाला और जस्टिस मिलिंद जाधव की खंडपीठ ने भिवंडी कस्बे के कांबे ग्रामवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

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याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से जल वितरण कंपनी एसटीईएम को रोजाना पानी की आपूर्ति करने के निर्देश देने की गुहार लगाई है। यह कंपनी ठाणे जिला परिषद और भिवंडी निजामपुर म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का साझा उपक्रम है। याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि अभी उन्हें माह में केवल दो बार ही पानी मिल रहा है।

इसे लेकर एसटीईएम के प्रबंध निदेशक भाउसाहेब डांगड़े ने कोर्ट को जानकारी दी है कि एक विशेष बिंदू तक पानी रोजाना पहुंचाया जा रहा है लेकिन वहां से याचिकाकर्ताओं के घरों तक इसकी आपूर्ति की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की है।
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डांगड़े ने कहा, गांव में आबादी बढ़ने के कारण बीते कुछ वर्षों में पानी की मांग बढ़ गई है। लिहाजा, हमें व्यवस्था उन्नत करने की जरूरत है। पीठ ने पूछा, व्यवस्था उन्नत होने तक याचिकाकर्ताओं को क्या करना चाहिए। जजों ने कहा, मौजूदा हालात के मद्देनजर कम से कम कुछ घंटों के लिए रोजाना पेयजल आपूर्ति की जानी चाहिए क्योंकि यह ग्रामवासियों का मौलिक अधिकार है। 

कहने पर मजबूर न करें कि सरकार विफल
जजों ने कहा, हमें यह कहने पर मजबूर मत कीजिए कि महाराष्ट्र सरकार नागरिकों को पानी मुहैया कराने में विफल हो गई है। हम यह नहीं मानते कि सरकार इतनी लाचार है और हम इस मामले पर शीर्ष अधिकारियों को बुलाने से भी नहीं हिचकिचाएंगे। याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया है कि एसटीईएम स्थानीय नेताओं व टैंकर लॉबी वालों तक अवैध रूप से पानी पहुंचा रही है। उनका कहना है कि मुख्य पाइपलाइन से 300 अवैध पानी के कनेक्शन जुड़े हुए हैं।

अवैध कनेक्शनों को लेकर शिकायत दर्ज क्यों नहीं
जस्टिस कथावाला ने कहा, कंपनी ने अवैध कनेक्शनों को लेकर पुलिस के पास शिकायत तक दर्ज कराने की तकलीफ नहीं उठाई और उसकी निष्क्रियता के चलते याचिकाकर्ताओं को उनके अधिकार का पानी नहीं मिल रहा है। लिहाजा, सबसे पहले कंपनी ऐसे अवैध कनेक्शन हटाए।

साथ ही उन्होंने कहा, डांगड़े समस्या के समाधान में इच्छुक नहीं दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, डांगड़ ने जवाब दिया कि जब हम अवैध कनेक्शन हटाने जाते हैं तो 150 से ज्यादा लोगों की भीड़ एकत्र होकर प्रदर्शन करने लगती है। खंडपीठ ने डांगड़े को अदालत में हाजिर होकर हलफनामा देने के निर्देश दिए हैं। अब मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को होगी।
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