महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के सामने उठ रहे सवाल अब बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में पिछले करीब 10 महीनों में लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि इन फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने आपत्तियां दर्ज कराई थीं। मामले को 28 सितंबर को संबंधित पीठ के सामने मेंशन किए जाने की संभावना है।
क्या 14 फैसलों को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में क्या मांग की गई?
कोल्हापुर पीठ में वकील असीम सरोदे के जरिए दाखिल याचिका में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े 14 प्रशासनिक आदेशों और कार्रवाइयों को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि ये फैसले मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची तैयार करने, वोटर लिस्ट के डेटाबेस और चुनाव पंजीकरण अधिकारियों के कामकाज से जुड़े हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इन मामलों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
किन फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति का दावा किया गया?
याचिका में जिन मामलों का जिक्र है, उनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम हटाने और फिर बहाल करने, एसआईआर के दौरान नाम बहाल करने से जुड़े आदेशों के खिलाफ अपील और मतदाता सूची के डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिका में यह दावा भी किया गया है कि कुछ फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। इनमें फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता सूची से जुड़े डेटाबेस तथा आईटी सिस्टम में बदलाव का मुद्दा भी शामिल बताया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर और मतदाता सूची को लेकर क्या मांग रखी?
याचिका में एसआईआर के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा जिन राज्यों में एसआईआर हुई है, वहां नई और कानूनी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची तैयार होने तक आगामी विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग भी रखी गई है। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग की है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 से जुड़े सवाल भी उठाए गए हैं।
महाराष्ट्र की एसआईआर पर दूसरी याचिका में क्या कहा गया?
बॉम्बे हाई कोर्ट की मुख्य पीठ के सामने महाराष्ट्र में चल रही एसआईआर को लेकर अलग याचिका भी दाखिल की गई है। इसे वकील हितेंद्र गांधी के जरिए दाखिल किया गया है। इस याचिका में साफ कहा गया है कि याचिकाकर्ता एसआईआर को रोकने या चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की मांग नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग मतदाता की चुनावी पात्रता का आकलन कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं कर सकता। याचिका में एसआईआर शुरू करने के आदेश और उसके पीछे दर्ज कारण सार्वजनिक करने, प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने और पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने से रोकने के लिए सुरक्षा उपाय करने की मांग की गई है।
बीएलओ पर क्या आरोप लगाया गया है और 28 सितंबर को क्या होगा?
दूसरी याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद कुछ बूथ लेवल अधिकारी यानी बीएलओ लोगों से एसआईआर फॉर्म लेते समय सहायक दस्तावेज मांग रहे हैं। याचिका में इस प्रक्रिया को आयोग के निर्देशों के मुताबिक चलाने की मांग की गई है। दोनों याचिकाओं में मतदाता सूची तैयार करने, एसआईआर के दौरान नाम हटाने और चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग सवाल उठाए गए हैं। दोनों मामलों के 28 सितंबर को संबंधित पीठों के सामने मेंशन किए जाने की संभावना है। अभी इन याचिकाओं में लगाए गए आरोपों पर अदालत का कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं आया है।