सुप्रीम कोर्ट ने सोशल मीडिया पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदमों पर केंद्र सरकार द्वारा जवाब न दिए जाने पर गहरी चिंता जताई है। अदालत ने इस मामले में सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करने का अंतिम अवसर दिया है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा कानून और न्याय मंत्रालय को अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने साफ किया कि दोनों मंत्रालय यह बताएं कि शीर्ष अदालत के सितंबर 2024 के फैसले को लागू करने और ऑनलाइन आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
पीठ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की ओर से ऐसी सामग्री की सूचना कानून प्रवर्तन एजेंसियों को अनिवार्य रूप से देने के निर्देशों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।
मीडिया रिपोर्ट पर उठा मामला
केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने पीठ को बताया कि सरकार इस मुद्दे को पूरी गंभीरता से ले रही है और एक कंपनी के खिलाफ नोटिस जारी कर कार्रवाई भी शुरू की गई है। यह मामला तब उठा जब एक मीडिया रिपोर्ट में इंस्टाग्राम पर ऐसी आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों का आरोप लगाया गया था।