महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में एक अस्पताल के बाहर सड़क पर मरीजों का इलाज किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले पर हलफनामा दायर करने को कहा है। सरकारी वकील पीपी काकड़े कोर्ट के बताया कि अस्पताल में क्षमता केवल 30 बेड की है, लेकिन लगभग 150 से अधिक लोग पेट की समस्याओं से जुड़ी शिकायत को लेकर अस्पताल पहुंचे थे। मिठाई खाने के बाद इन सभी लोगों को फूड पॉइजनिंग हो गया था। उन्होंने कोर्ट से भले ही कोर्ट में पर्याप्त जगह नहीं थी, लेकिन अस्पताल में पर्याप्त कर्मचारी और दवाएं मौजूद थी।
अस्पताल के भीतर पर्याप्त बिस्तर नहीं थे- सरकारी वकील
सुनवाई के दौरान काकड़े ने कोर्ट से कहा कि मरीजों को तत्काल इलाज के बाद अगले दिन छुट्टी दे दी गई थी। पेट की समस्या को लेकर आए मरीजों में किसी की भी हालत गंभीर नहीं थी। अस्पताल के भीतर पर्याप्त बेड नहीं थे, इसलिए उनका इलाज बाहर किया गया। इस दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि अगर किसी की हालत अचानक गंभीर हो जाए तो क्या होगा। न्यायाधीश ने कहा कि जिस स्थान पर यह घटना घटी वहां से जिला अस्पताल की दूरी कितनी है।
घटना स्थल से कितनी दूरी पर जिला अस्पताल- कोर्ट
सरकारी वकील पीपी काकड़े ने जवाब देते हुए कहा कि घटना स्थल से जिला अस्पताल 100 किलोमीटर की दूरी पर था। अगर किसी भी व्यक्ति की हालत गंभीर होती तो उसे वहां से स्थानांतरित कर दिया जाता। कोर्ट ने काकड़ से कहा कि ये सब विवरण जमा करते हुए एक हलफनामा दायर करें। जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई 10 दिनों के बाद तय की गई।
बुलढाणा की जिला कलेक्टर किरण पाटिल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि यह घटना लोनार तालुका के सोमथाना गांव में एक सप्ताह तक चलने वाले धार्मिक आयोजन हरिनाम सप्ताह के दौरान मंगलवार रात को हुई। मरीजों को खुली जगह पर तरल पदार्थ दिए जाने की तस्वीरें रिपोर्ट की गईं।