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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा: फैसला सुनाने से पहले सुनेंगे महाराष्ट्र के कार्यवाहक डीजीपी का पक्ष, पद पर स्थाई नियुक्ति की मांग का मामला

Fri, 28 Jan 2022 05:22 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी के पद को कार्यवाहक नहीं रखा जा सकता है। 2006 की व्यवस्था के अनुसार न्यूनतम कार्यकाल संबंधी अर्हताएं पूरी करने वाले अधिकारी को इस पद पर नियुक्त किया जाना चाहिए। 
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बॉम्बे हाईकोर्ट - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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महाराष्ट्र में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद पर स्थायी नियुक्ति किए जाने की मांग करने वाली एक याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। अदालत ने इस दौरान कहा कि हम इस मामले में आदेश जारी करने से पहले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और महाराष्ट्र के वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी संजय पांडेय का पक्ष सुनेंगे। 

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मुख्य न्यायाधीश दीपंकर दत्ता और न्यायमूर्ति एमएस कर्णिक की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि हमने इस सप्ताह की शुरुआत में मामले को समाप्त कर दिया था और कहा था कि पांडेय का पक्ष सुनने की जरूरत नहीं है। लेकिन, बाद में अदालत को पता चला कि याचिका में आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कुछ सीधे आरोप लगाए गए हैं।

पहले संजय पांडेय का पक्ष सुनेंगे, फिर सुनाएंगे फैसला: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा, 'इस मामले में हमारे फैसले को पढ़ते हुए हमारे सामने याचिका के कुछ पैराग्राफ आए जहां संजय पांडेय के खिलाफ कुछ सीधे-सीधे आरोप हैं। इसके मद्देनजर हम याचिका में प्रतिवादी के तौर पर संजय पांडेय को पक्ष बनाना उचित और जरूरी समझते हैं। हम पहले उनका पक्ष सुनेंगे और फिर अपना फैसला सुनाएंगे।'

राज्य सरकार और यूपीएससी भी दाखिल कर सकते हैं हलफनामा
अदालत ने फैसले के लिए मामले को सुरक्षित रखने का अपना 25 जनवरी का आदेश दोहराया। पीठ ने शुक्रवार को संजय पांडेय को इस याचिका पर चार फरवरी तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था। पीठ ने सुनवाई स्थगित करते हुए कहा कि राज्य सरकार और संघ लोक सेवा आयोग भी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
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अधिवक्ता दत्ता माने की ओर से दाखिल की गई जनहित याचिका
यह जनहित याचिका अधिवक्ता दत्ता माने की ओर से दाखिल की गई है। इसमें राज्य सरकार को डीजीपी के पद पर स्थाई नियुक्ति करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। माने के वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने दलील दी है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार राज्य के शीर्श पुलिस अधिकारी के पद को कार्यवाहक नहीं रखा जा सकता।
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