महाराष्ट्र ट्रेड यूनियनों की मान्यता(एमआरटीयू एक्ट) और अनुचित श्रम व्यवहार रोकथाम अधिनियम(पीयूएलपी एक्ट) के तहत कर्मचारियों की परिभाषा में कामकाजी पत्रकार शामिल नहीं है। एक मामले में सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि क्योंकि उन्हें एक विशेष दर्जा प्राप्त है।
एक औद्योगिक अदालत के समक्ष इस कानून के तहत एक पत्रकार द्वारा दायर की गई शिकायत सुनवाई योग्य नहीं होगी। खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारों को वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट के तहत एक विशिष्ट दर्जा प्राप्त है, जो उन्हें महाराष्ट्र ट्रेड यूनियनों की मान्यता और अनुचित श्रम प्रथाओं की रोकथाम अधिनियम (एमआरटीयू और पीयूएलपी अधिनियम) के बजाय औद्योगिक विवाद अधिनियम के जरिए विवादों को निपटान करने में सक्षम बनाता है।
इस मुद्दे को हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश द्वारा खंडपीठ के पास भेजा गया था, जिसने पाया कि एमआरटीयू और पीयूएलपी अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए कामकाजी पत्रकारों की पात्रता के संबंध में विरोधाभासी निर्णय थे। यह फैसला दो कामकाजी पत्रकारों द्वारा अपने संबंधित समाचार पत्र प्रतिष्ठानों के खिलाफ दायर दो याचिकाओं सुनाया गया था।
उच्च न्यायालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम में उल्लिखित प्रावधानों के अनुसार विवादों को हल करने की आवश्यकता पर बल देते हुए श्रमजीवी पत्रकार अधिनियम के तहत कामकाजी पत्रकारों को दिए गए विशेष विशेषाधिकारों को बरकरार रखा। पीठ ने कहा कि 1955 के वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट ने पहले ही औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत विवाद समाधान के लिए एक तंत्र स्थापित कर दिया है।