बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे लोकसभा सीट पर उपचुनाव न कराने को लेकर चुनाव आयोग के रूख पर कड़ी आपत्ति जताई है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पुणे लोकसभा सीट पर तत्काल उपचुनाव कराने के चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को लंबे समय तक प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा- चुनाव आयोग के आधार विचित्र
न्यायमूर्ति गौतम पटेल और न्यायमूर्ति कमल की खंडपीठ ने 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी सहित अन्य चुनावों में व्यस्त होने के चुनाव आयोग के कारण की जमकर आलोचना की। कोर्ट ने इसे विचित्र और पूरी तरह से अनुचित करार दिया। बता दें मार्च माह में भाजपा सांसद गिरीश बापट के निधन के बाद पुणे लोकसभा सीट खाली हो गई थी।
बिना प्रतिनिधित्व के लोगों को छोड़ा नही जा सकता- कोर्ट
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में शासन निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है, क्योंकि वह लोगों की आवाज है। अब क्षेत्र में प्रतिनिधि ही नहीं तो उन स्थानीय लोगों की आवाज कौन उठाएगा। संसदीय व्यवस्था में लोग को बिना प्रतिनिधित्व के छोड़ा नहीं जा सकता है। यह पूरी तरह से असंवैधानिक है।
साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह आधार कि चुनाव आयोग की पूरी मशीनरी 2024 के लोकसभा चुनाव की तैयारी गतिविधियों में व्यस्त थी, विचित्र है। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग का काम चुनाव कराना, किसी भी रिक्त पद को भरना है। चुनाव आयोग कैसे किसी क्षेत्र को बिना प्रतिनिधित्व के रहने दे रहा है।
बता दें कोर्ट पुणे में लोकसभा सीट पर उपचुनाव न कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा जारी पत्र के खिलाफ पुणे निवासी सुघोष जोशी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। चुनाव आयोग ने कहा था कि दो आधार पर उपचुनाव नहीं कराएगा। पहला- 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी, गतिविधियों सहित अन्य चुनावों में व्यस्तता। दूसरा- अगर पुणे में उप चुनाव हुआ तो भी निर्वाचित प्रतिनिधि का कार्यकाल बहुत कम होगा।