सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को एक दिव्यांग व्यक्ति को फर्जी सीबीआई अफसर बनकर लोगों से ठगी करने का दोषी माना और उसे तीन साल जेल की सजा सुनाई। दोषी 80 फीसदी दिव्यांग है और वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने पेश हुआ। सीबीआई की विशेष अदालत के जज वीपी देसाई ने अश्विनी कुमार को संबंधित धाराओं में दोषी पाया। अश्विनी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर फिल्म निर्माता राकेश रोशन समेत करीब 200 लोगों से लाखों रुपये की ठगी की।
80 फीसदी तक दिव्यांग है आरोपी
दोषी पाया गया अश्विनी कुमार हरियाणा में रहता है। सीबीआई की विशेष अदालत ने बीते महीने उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर उसे मुंबई में सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था, ताकि उसके खिलाफ फैसला सुनाया जा सके। आरोपी ने इसके खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि वह एक दुर्घटना के चलते 80 फीसदी दिव्यांग है और इस कारण हरियाणा से मुंबई तक का सफर करके अदालत पहुंचने में असमर्थ है। इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल जज वाली पीठ ने आरोपी को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीबीआई की विशेष अदालत की सुनवाई में पेश होने की मंजूरी दे दी थी।
हाईकोर्ट ने लिया हलफनामा
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में पेश होने की मंजूरी देते हुए हाईकोर्ट ने उससे हलफनामा लिया कि वह बाद में यह दावा नहीं करेगा कि फैसला अवैध है क्योंकि यह तब हुआ, जब वह अदालत में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं था। आरोपी के हलफनामा देने के बाद अदालत ने उसे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश होने की छूट दे दी थी। आरोपी पानीपत के जिला कोर्ट से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत की सुनवाई में शामिल हुआ। इस दौरान सीबीआई के अधिकारी भी पानीपत की जिला कोर्ट में मौजूद रहे।
फर्जी सीबीआई अफसर बनकर लोगों से ठगी करने का आरोप
दोषी अश्विनी कुमार ने साथी राजेश रंजन के साथ मिलकर साल 2011 में फर्जी सीबीआई अफसर बनकर करीब 200 लोगों से ठगी की। जिन लोगों के साथ धोखाधड़ी की गई, उनमें फिल्म निर्माता राकेश रोशन भी शामिल हैं। आरोपियों ने राकेश रोशन के एक सिविल मामले को सेटल कराने के नाम पर 50 लाख रुपये लिए थे। जब मामला सेटल नहीं हुआ तो राकेश रोशन में इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच कर आरोपियों का भंडोफोड़ किया।