कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा चुनाव में जाति गणना को मुद्दा बनाने की तैयारी से भाजपा सतर्क है। इस मुद्दे पर बृहस्पतिवार को पहली बार ओबीसी नेताओं की बैठक बुला कर पार्टी नेतृत्व ने इस मुद्दे के जमीनी स्तर का आकलन करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी ने जमीनी स्तर का फीडबैक लेने के बाद इसकी काट में चुनिंदा राज्यों में सामाजिक (जातीय) सम्मेलन करने की योजना बनाई है।
बृहस्पतिवार को गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अगुवाई में हुई बैठक में जाति गणना पर गंभीर चर्चा हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक में नेताओं से जाति गणना पर जमीनी असर का पता लगाने के लिए कहा गया है। पार्टी के पिछड़ा वर्ग के नेता अलग-अलग इलाकों पर इस मुद्दे के सियासी असर की जानकारी इकट्ठा कर नेतृत्व को सूचित करेंगे।
उपलब्धियां गिनाने की तैयारी
इन सम्मेलनों में मोदी सरकार के करीब दस साल के कार्यकाल में ओबीसी के लिए किए गए कार्यों को सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रचारित किया जाएगा। मसलन ओबीसी मतदाताओं को मोदी सरकार के कार्यकाल में ओबीसी आयोग को सांविधानिक दर्जा दिए जाने, नीट में ओबीसी कोटा बहाल करने समेत दूसरी उपलब्धियों की जानकारी दी जाएगी।
तैयार होगी भावी रणनीति
सूत्र ने बताया कि अगर फीडबैक में जाति गणना के जमीनी स्तर पर मजबूत असर की बात सामने आई तो सरकार इस वर्ग के हित में कई निर्णय ले सकती है। इसमें से एक ओबीसी वर्ग के लिए अलग मंत्रालय का गठन भी है। इसके अलावा सरकार पहले से ही ओबीसी क्रीमी लेयर का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर चुकी है।
हिंदी पट्टी पर रहेगा ज्यादा ध्यान
भाजपा ने जाति गणना पर फीडबैक से पहले चुनिंदा राज्यों में जातीय सम्मेलन करने की योजना बनाई है। इसे सामाजिक सम्मेलन का नाम दिया गया है। ये सम्मेलन मुख्य रूप से हिंदी पट्टी के उन राज्यों में आयोजित किए जाएंगे जहां अभी भी जातीय राजनीति का बोलबाला है। इसके अलावा महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे कुछ दूसरे राज्यों में भी जातीय सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा। इसकी शुरुआत संभवत: दिसंबर महीने में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद होगी।