दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी बैठक में अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और अन्य नेता।
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राजधानी दिल्ली में सभी दल अपनी चुनावी तैयारी में जुट गए हैं। इस बार दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए भाजपा ने महिलाओं पर अपना दांव लगाया है। पार्टी ने राजधानी के हर बूथ पर पांच और पूरी दिल्ली में लगभग 70 हजार कमल सखियां बनाने का प्लान बनाया है। इनका काम भाजपा के लिए हर बूथ पर दस नए महिला मतदाता बनाना है। पार्टी का अनुमान है कि यदि उसका ये प्लान कारगर रहा तो दिल्ली की सत्ता तक उसकी पहुंच आसान हो सकती है।
लोकसभा चुनाव 2024 में दिल्ली में कुल 13,637 बूथ बनाए गए थे। विधानसभा चुनाव के दौरान भी राजधानी में बूथों की संख्या थोड़ा कम या अधिक इसी के आसपास रह सकती है। पार्टी ने इन सभी बूथों पर पांच कमल सखी बनाने का लक्ष्य रखा है जिनका काम बूथ की महिला मतदाताओं तक पहुंचकर उन्हें केंद्र सरकार के उन कार्यों की जानकारी देना है जिसे केंद्र सरकार ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए किया है।
भाजपा नेताओं का मानना है कि महिलाओं की यह आपसी कानाफूसी किसी भी चुनावी अभियान से ज्यादा कारगर होती है। महिलाएं आसपड़ोस की महिलाओं की बात पर ज्यादा भरोसा करती हैं। ऐसे में यदि वह महिलाओं को सशक्त करने वाले कामों की जानकारी इनके माध्यम से लोगों तक पहुंचाएगी तो वह ज्यादा कारगर हो सकेगी।
दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऋचा पांडे मिश्रा ने बुधवार को संपन्न हुई महिला मोर्चा कार्यकारिणी की बैठक के बाद कहा कि केजरीवाल सरकार ने गली-गली में शराब की दुकानें खोलकर महिलाओं को अपमानित करने का काम किया था, जबकि केंद्र सरकार ने जनधन खाते खुलवाकर, ड्रोन दीदी बनाकर, छोटे उद्यमियों को सस्ता कर्ज उपलब्ध कराकर महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भाजपा की शक्ति बनेंगी और अरविंद केजरीवाल सरकार को इस बार सत्ता से जाना पड़ेगा।
डॉक्टर अलका गुर्जर ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने उज्जवला योजना, मुद्रा योजना, लखपति दीदी और जनधन खाते की योजना के जरिए महिलाओं को सशक्त करने का काम किया है। आज महिलाएं भाजपा के पक्ष में हैं। प्रधानमंत्री ने महिलाओं के लिए कई सारी योजनाओं को लागू कर उनकी आवाज को ताकत देने का काम किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिस सीट से चुनाव लड़ा, वहां भाजपा इतिहास में कभी नहीं जीती थी। लेकिन वहां भाजपा जीत सकी तो उसमें सबसे बड़ा योगदान महिलाओं का ही था। इसलिए अगर दिल्ली के अंदर अगर जीतना होगा तो हर बूथ पर एक 'कमल सखी' बनाने की जरूरत है।