मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा की दूसरी सूची जारी कर दी गई है। इसमें 39 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों का एलान किया गया है। खास बात यह है कि भाजपा ने इस लिस्ट में तीन केंद्रीय मंत्रियों को टिकट दिया है। इनमें मुरैना की दिमनी सीट से नरेंद्र सिंह तोमर, नरसिंहपुर से प्रह्लाद पटेल और निवास से फग्गन सिंह कुलस्ते को प्रत्याशी बनाया गया है।
भाजपा अपने चार सांसद को भी विधानसभा चुनाव लड़ा रही है। जबलपुर पश्चिम से राकेश सिंह, सतना से गणेश सिंह, सीधी से रीति पाठक और गाडरवारा से उदय प्रताप सिंह को प्रत्याशी बनाया गया है। भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को इंदौर विधानसभा क्रमांक 1 से टिकट दिया गया है। छिंदवाड़ा से विवेक बंटी साहू को उतारा गया है। 39 उम्मीदवारों में छह महिला उम्मीदवार हैं। इसके अलावा 14 एससी-एसटी उम्मीदवार हैं।
भाजपा ने दूसरी सूची में जिन 39 सीटों पर उम्मीदवारों का एलान किया है, इनमें से 36 पार्टी 2018 के चुनाव में हार गई थी। तीन सीटें पार्टी के कब्जे में आई थी- मैहर से नारायण त्रिपाठी, सीधी से केदार नाथ शुक्ला और नरसिंहपुर से जालम सिंह पटेल। हालांकि, इस पर बार तीनों के टिकट काट दिए गए हैं।
पार्टी ने कद्दावर नेताओं को मैदान में क्यों उतारा?
इस सूची से साबित हो रहा कि भाजपा इस चुनाव को कितनी गंभीरता से रही है और किसी भी हाल में वह यहां जीत हासिल करना चाहती है। तभी पार्टी ने केंद्रीय मंत्री और सांसदों को मैदान में उतारा है। कमजोर सीटों पर पार्टी को अपनी स्थिति खराब नजर आ रही थी। इसलिए पार्टी ने कद्दावर नेताओं को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है।
जानकारों का कहना है कि दूसरी सूची में सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि इसमें चारों ऐसे वरिष्ठ नेताओं को टिकट दिया गया है। जो मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा सकते है। इनमें नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते और कैलाश विजयवर्गीय शामिल हैं। यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है तो यह माना जाना चाहिए कि प्रदेश में अगर भाजपा की सरकार बनती है तो इनमें से ही कोई न कोई मुख्यमंत्री होगा। नरेंद्र सिंह तोमर को चुनावी जंग में उतारने का सीधा आशय यही लगाया जा सकता है। दिग्गजों-सांसदों को मैदान में उतार पार्टी ने यह संदेश दिया है कि हमारे लिए इस बार एक चेहरा नहीं महत्व नहीं रखता है। पार्टी इस बार जीत का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती। फिर चाहे उसे किसी को भी मैदान में उतारना क्यों न पड़े।
इंदौर विधानसभा-1 का मुकाबला होगा दिलचस्प
राष्ट्रीय महासचिव कैलाश ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के सामने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि यदि पार्टी चाहेगी तो मैं छिंदवाड़ा जाकर चुनाव लड़ना चाहूंगा। लेकिन उन्हें उन्हीं के शहर के ताकतवर उम्मीदवार संजय शुक्ला के सामने उतारा गया है। इस लिहाज से कहा जा सकता है कि इंदौर विधानसभा-1 का चुनाव बेहद रोचक और रोमांचक हो गया है। क्योंकि दोनों ही उम्मीदवार किसी मामले में एक दूसरे से कम नहीं है।
विंध्य से दो सांसद को मिला टिकट
भाजपा ने विंध्य क्षेत्र से दो सांसदों को मैदान में उतारा है। इनमें सतना सांसद गणेश सिंह को सतना विधानसभा से टिकट दी गई है। जबकि सीधी सांसद रीति पाठक को सीधी विधानसभा सभा से टिकट दी गई है।
नारायण त्रिपाठी का टिकट काटा गया
दूसरी सूची में मैहर के वर्तमान विधायक नारायण त्रिपाठी का टिकट काट दिया गया है। उनकी जगह सिंधिया के खास समर्थक श्रीकांत चतुर्वेदी को उम्मीदवार बनाया गया है। राजनगर सीट से अरविंद पटेरिया को उम्मीदवार बनाया गया है। पटेरिया प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के बेहद करीबी माने जाते है।
केदानाथ शुक्ला का टिकट कटा
सीधी से केदानाथ शुक्ला का टिकट काट दिया गया है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। शुक्ला का सीधी में अच्छी पकड़ मानी जाती है। इसके अलावा कांग्रेस नेता अजय सिंह से भी उनके अच्छे संबंध है। टिकट कटने की स्थिति में वह रीति पाठक को भी नुकसान पहुचा सकते हैं।
लहार से नेता प्रतिपक्ष को चुनौती देंगे डॉ. अमरेश शर्मा
लहार से भाजपा ने डॉ. अमरेश शर्मा गुड्डू को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने कांग्रेस के क्षेत्रिय उम्मीदवार के खिलाफ ब्राह्णण चेहरा उतारा हैं। लहार से नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह सात बार से चुनाव जीत रहे है। इस बार भी उनकी स्थिति मजबूत है।
सिंधिया समर्थकों को भी टिकट
- दूसरी सूची में सिंधिया समर्थकों में इमरती देवी, मोहन सिंह राठौड़, श्रीकांत चतुर्वेदी, रघुराज कंसाना, हिरेंद्र सिंह बंटी को टिकट दिया गया है। करैरा से सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव का टिकट कट गया है। 2018 में ये कांग्रेस विधायक चुने गए थे।
- सिंधिया के साथ भाजपा में आए और 2020 का चुनाव प्रगीलाल से हार गए थे। इस बार इनका टिकट काट दिया गया है। भाजपा ने यहां से रमेश खटीक को प्रत्याशी बनाया है, हालांकि मुरैना से सिंधिया समर्थक रघुराज कंसाना और डबरा से इमरती देवी को टिकट मिल गया है। इसके अलावा सिंधिया के करीबी मोहन सिंह राठौर को भितरवार सीट से टिकट दिया गया है।
- पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के गढ़ राघौगढ़ में बीजेपी ने हीरेंद्र सिंह बंटी बना को उम्मीदवार बनाया है। इनके पिता मूल सिंह विधायक रह चुके हैं। हीरेंद्र भी दिग्विजय के करीबी रहे हैं। ये डेढ़ साल पहले ही बीजेपी में शामिल हुए थे। अभी राघौगढ़ में दिग्विजय सिहं के बेटे जयवर्धन सिंह कांग्रेस से विधायक है।
सात पूर्व विधायकों को मिला टिकट
- श्योपुर से भाजपा के पूर्व विधायक दुर्गालाल विजय
- मुरैना से रघुराज कंसाना
- सेंवढ़ा से प्रदीप अग्रवाल
- डबरा से इमरती देवी
- करैरा से रमेश खटीक
- कोतमा से दिलीप जायसवाल
- सिहावल से विश्वामित्र पाठक
- जुन्नारदेव से नत्थन शाह
- खिलचीपुर से हजारी लाल दांगी
- थांदला से कल सिंह भाबर
- देपालपुर से मनोज पटेल
- सैलाना से संगीता चारेल
13 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई थी बैठक
भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक गत 13 सितंबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में हुई थी। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्य मौजूद थे। इस बैठक में भाजपा की दूसरी सूची को हरी झंडी दी गई।
पिछले MP विधानसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन
2018 के राज्य चुनावों में, बीजेपी ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों में सत्ता खो दी. लेकिन वह एक साल से अधिक समय के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को गिराने में सफल रही. बीजेपी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा की 90 सीटों में से केवल 15 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 68 सीटें मिलीं. दूसरी तरफ 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में बीजेपी को 109 जबकि कांग्रेस को 114 सीटों पर जीत मिली थी।