माधव ने दावा किया कि अनुच्छेद 370 को हटाने के लिए साहस की आवश्यकता थी, जिसे कांग्रेस नहीं दिखा सकी। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाया जाना पांच दशकों से हमारे एजेंडे पर था, हम इस पर कायम रहे और हमने लोकतांत्रिक तरीके से ऐसा किया।
माधव ने कहा कि अगर यहां औरंगाबाद में अनुच्छेद 370 होता, तो यह कभी भी औद्योगिक शहर नहीं होता। जम्मू कश्मीर में 1950 के दशक से कोई बड़ा निवेश नहीं हुआ था और अनुच्छेद 370 इसमें बाधक था। अब वहां भी तेजी से विकास होगा।
गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो)
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने सोमवार को दावा किया कि राज्य में सबकुछ ठीक नहीं है और इस सरकार निर्मित आपदा ने कारोबार खत्म कर दिया है और लाखों लोग भूखमरी के कगार पर हैं।
जम्मू और कश्मीर के छह दिनों का दौरा करने के बाद वापस दिल्ली लौटे आजाद ने यह भी कहा कि लाखों मजदूरों को तत्काल राशन पहुंचाया जाए, गिरफ्तार नेताओं को रिहा किया जाए तथा नए सिरे से परिसीमन के बाद ही वहां ब्लॉक स्तरीय चुनाव कराए जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीर के लोग गांधीवादी रास्ते पर चलकर सविनय अवज्ञा के रास्ते पर चल रहे हैं, लेकिन उनकी यह मुहिम सरकार नहीं बल्कि अपने खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर का दौरा करने वाले आजाद ने संवाददाताओं से कहा कि कश्मीर के लोग सविनय अवज्ञा के रास्ते पर चल रहे हैं। उनकी यह मुहिम अपने खिलाफ है। उनका कहना है कि कोई कारोबारी गतिविधि में भाग नहीं लेंगे और भूखे रहेंगे।
आजाद ने कहा कि मुख्य रूप से कश्मीर की अर्थव्यवस्था पर्यटन, हैंडीक्राफ्ट और फल के कारोबार पर निर्भर है। सरकार निर्मित आपदा से लोगों का पूरा कारोबार खत्म हो गया है।
उन्होंने कहा कि भुखमरी का सामना कर रहे लाखों मजदूरों को छह महीने तक राशन मुफ्त दिया जाना चाहिए, इंटरनेट टेलीफोन सेवा बहाल हों, नेताओं को रिहा किया जाए, बैंक कर्ज की क़िस्त की अदायगी का समय एक-डेढ़ साल आगे बढ़ाया जाए, ब्याज दर कम की जाए।