भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक।
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भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश के सबसे अहम सूबे उत्तर प्रदेश में मिशन 2024 की तैयारियों पर गंभीर विमर्श हुआ है। पार्टी ने गुजरात में ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभा कर चर्चा में आए वहां के प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल को सबसे अहम सूबे का प्रभार देने का संकेत दिया है। चर्चा है कि उन्हें या तो केंद्र में मंत्री बनाकर या फिर केंद्रीय संगठन में शामिल कर इस आशय की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी इस राज्य में साल 2014 के प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ना चाहती है। इसके लिए पार्टी पहले की तरह राज्य में फिर से छोटे दलों और समूहों को साधने की मुहिम चलाएगी। पुराने सहयोगियों से रिश्ते मजबूत करेगी। इस दौरान विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी से नाता तोड़ने वाले नेताओं, दलों और समूहों को नए सिरे से साधा जाएगा। पार्टी राज्य में पहले की तरह ही हिंदुत्व और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन साधने की भी कवायद शुरू करेगी।
सामाजिक समीकरण करेंगे दुरुस्त
पार्टी को पता है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से हो कर जाता है। ऐसे में पार्टी इस राज्य में रत्ती भर भी खतरा नहीं उठाना चाहती। इस क्रम में पार्टी की योजना साल 2014 की तरह ही सामाजिक समीकरण को दुरुस्त करने की है। तब पार्टी ने गैरयादव ओबीसी, गैरजाटव एससी और हिंदुत्व का दांव चला था।
- अब पार्टी की योजना इस सामाजिक समीकरण में पसमांदा मुसलमानों और क्षेत्र विशेष से जुड़ी यादव बिरादरी को साधने की है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि नया समीकरण तैयार करने के लिए निकट भविष्य में कई तरह के बदलाव किए जाएंगे।
पाटिल के नाम की चर्चा क्यों?
हालिया गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी को लगातार सातवीं और अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल हुई। इस जीत का श्रेय चुनाव से पहले अध्यक्ष बनाए गए पाटिल को दिया गया। महाराष्ट के जलगांव में जन्मे और गुजरात को कर्मभूमि बनाने वाले पाटिल पीएम मोदी के बेहद करीबी हैं। बीते चुनाव में नवसारी में पाटिल ने अपने संसदीय क्षेत्र में अनूठे प्रयोगों के जरिए संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी जीत हासिल की। अध्यक्ष बनने के बाद पाटिल ने अपने संसदीय क्षेत्र में पन्ना समिति के अभिनव प्रयोग को सभी विधानसभा सीटों पर लागू किया। इसके तहत मतदाता सूची के हर पृष्ठ के लिए एक समिति बनाई गई और चार से पांच मतदाताओं को मतदान केंद्र लाने की जिम्मेदारी एक कार्यकर्ता को दी गई।