भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर पांच समुदायों के अल्पसंख्यक दर्जे के खिलाफ विभिन्न हाईकोर्ट में विचाराधीन मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग की। इन समुदायों में मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और पारसी शामिल हैं।
अधिवक्ता अश्वनी कुमार दुबे द्वारा दाखिल की गई याचिका में कहा गया कि दिल्ली, मेघालय और गुवाहाटी हाईकोर्ट में 1992 के राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग कानून की धारा 2सी की सांविधानिक वैधता को चुनौती देने वाले सभी मामलों को स्थानांतरित किया जाए। इसमें कहा गया कि अलग-अलग जगह मुकदमों की बहुलता और परस्पर विरोधी विचारों से बचने के लिए हम चाहते हैं कि सभी मामलों की सुनवाई एक जगह की जाए।
दलील दी गई कि वास्तविक अल्पसंख्यकों को अल्पसंख्यक अधिकारों से वंचित करना गलत है। ऐसे में इन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई होनी चाहिए। इसके अलावा याचिका में हिंदुओं को छह राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों में अल्पसंख्यक देने की मांग की गई है। इसमें दलील है कि 2011 की जनगणना में इन जगहों पर हिंदुओं की आबादी घटी है।
2011 की जनगणना के मुताबिक मिजोरम में 2.75 फीसदी हिंदू आबादी है। इसी तरह नगालैंड में 8.75 फीसदी, मेघालय में 11.53 फीसदी, अरुणाचल प्रदेश में 29, मणिपुर में 31.39 और पंजाब में 38.40 फीसदी हिंदू आबादी है। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 28.44 और लक्षद्वीप में महज 2.5 फीसदी आबादी हिंदू है।