तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) का नाम बदलने पर तेलंगाना की भाजपा और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) की आलोचना की है। वहीं हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने इस फैसले का स्वागत किया है। बता दें कि टीआरएस का नाम बदलकर 'भारत राष्ट्र समिति' (बीआरएस) कर दिया गया है।
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रेवंत रेड्डी ने आरोप लगाया कि केसीआर ने तेलंगाना के अस्तित्व को खत्म कर दिया है और पारिवारिक विवादों को निपटाने और राजनीतिक लालच को पूरा करने के लिए पार्टी का नाम बदला गया है। उन्होंने दावा किया कि केसीआर चुनाव लड़ने के योग्य नही हैं। उन्होंने कहा कि माटी का बेटा होने के कारण वह राव के इस बुरे विचार की कड़ी निंदा करते हैं।
तेलंगाना भाजपा के मुख्य प्रवक्ता कृष्ण सागर राव ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब कि किसी क्षेत्रीय पार्टी ने राष्ट्रीय महत्वकांक्षाएं पाली हैं। 1947 के बाद से कई दलों ने कोशिश की और असफल रहे हैं। इनमें एआईडीएमके, डीएमके, टीडीपी, एसपी, बीएसपी, आरजेडी, टीएमसी और हाल ही में आप शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा का मानना है कि यह कोई तेलंगाना मॉडल नहीं है और यह केवल मुख्यमंत्री की कल्पना में ही मौजूद है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ऐसा कोई मॉडल देश को नहीं बेचा जा सकता है जो मौजूद ही नहीं है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री केसीआर की पहल आत्मघाती साबित होगी। भाजपा ने कहा कि टीआरएस से बीआरएस नाम बदलने से उनको घरेलू मैदान पर नुकसान होगा। वह बेकार में ही राष्ट्रीय महत्वकांक्षा पाल रहे हैं।
वहीं प्रदेश में टीआरएस की सहयोगी एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक ट्वीट में राव को इसके लिए बधाई दी। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि उनको पार्टी की नई शुरुआत पर मेरी शुभकामनाएं।
इससे पहले मंगलवार को पार्टी प्रमुख केसीआर ने घोषणा की थी कि पार्टी की आम सभा ने सर्वसम्मति से नाम को टीआरएस से बीआरएस में बदलने का संकल्प लिया है। टीआरएस को साल 2000 में लॉन्च किया गया था। 22 साल बाद यह एक राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। केसीआर के इस कदम को आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी के प्रवेश के तौर पर देखा जा रहा है।