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Emergency: 'क्या जयप्रकाश के नेतृत्व में हुआ आंदोलन अराजकता था?' आपातकाल पर संजय राउत के बयान से भड़की भाजपा

Sat, 13 Jul 2024 03:25 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 'मैं इंडी गठबंधन के नेताओं से पूछना चाहता हूं कि क्या जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुआ आंदोलन अराजकता था?
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सुधांशु त्रिवेदी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत ने शनिवार को अपने एक बयान में आपातकाल लागू करने के इंदिरा गांधी सरकार के फैसले का बचाव किया। जिसके बाद भाजपा को कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर हमला करने का मौका मिल गया। भाजपा ने आरोप लगाया कि अगर कल को कांग्रेस और इंडी गठबंधन को फिर से सत्ता में आने का मौका मिला तो वे फिर से देश में आपातकाल लागू कर देंगे।
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भाजपा ने पूछा- क्या लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह अराजकता का हिस्सा थे?
दरअसल शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत ने आज अपने एक बयान में कहा कि कुछ लोग देश में अराजकता फैलाना चाहते थे, जिसके चलते आपातकाल लागू किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में अगर अटल बिहारी वाजपेयी भी प्रधानमंत्री होते तो वो भी आपातकाल लागू कर देते। संजय राउत के इस बयान पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 'मैं इंडी गठबंधन के नेताओं से पूछना चाहता हूं कि क्या जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुआ आंदोलन अराजकता था? मैं पूछना चाहता हूं कि लालू प्रसाद यादव और अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव अराजकता का हिस्सा थे?'
 
'कांग्रेस और इंडी गठबंधन फिर सत्ता में आया तो आपातकाल लागू करेगा'
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने संजय राउत के बयान पर कहा कि 'कांग्रेस कहती है कि हम आपातकाल को लेकर माफी मांग चुके हैं तो फिर इस बारे में बात क्यों कर रहे हो, लेकिन आज ये साफ हो गया है कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन आपातकाल का समर्थन करता है और इसकी निंदा नहीं करता। यहां तक कि भूपेश बघेल ने भी हाल ही में कहा था कि इंदिरा गांधी में हिम्मत थी, तभी उन्होंने आपातकाल लागू किया...कल अगर कांग्रेस और इंडी गठबंधन सत्ता में आ गया तो वे फिर से आपातकाल लागू करेंगे।'
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केंद्रीय मंत्री प्रलहाद जोशी ने कहा कि 'कांग्रेस को सिर्फ सुर्खियों की चिंता है, उन्हें संविधान और लोकतंत्र को सुरक्षित करने से कोई मतलब नहीं है। क्या वे अब भी आपातकाल का बचाव कर रहे हैं? ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों, इसी सोच के साथ संविधान हत्या दिवस मनाने का एलान किया गया है, विपक्ष को इसका सम्मान करना चाहिए और इसका स्वागत करना चाहिए।'
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