Twitter war on Electoral Bonds
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मुंबई आतंकी हमले के शहीदों की गरिमा के साथ ये खिलवाड़ क्यों किया गया। देश हित के ऊपर पैसों को वरीयता देकर भाजपा ने देश विरोधी कार्य किया है। कांग्रेस यहीं पर नहीं रूकी, अगले ट्वीट में कहा, भाजपा सिर्फ पैसे का रंग देखती है, देने वाले का ढंग नहीं। भले ही वह आतंक को फंडिंग करने वाली कंपनी ही क्यों न हो। भाजपा को सिर्फ पैसा चाहिए।पीएम मोदी से आज देश जवाब मांग रहा है कि 1993 के बम धमाकों के आरोपी को पैसा देने वाली कंपनी से भाजपा ने चंदा क्यों लिया है। मनीष तिवारी ने चुनावी बांड की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती है, वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे।
भाजपा ने इस तरह लगाया चौका, वैसी ही भाषा में दिया जवाब...
रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भाजपा के ट्विटर पर लिखा, मोदी सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड से राजनीति में इस्तेमाल होने वाले कालेधन का रास्ता बंद कर दिया है। इससे राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में पारदर्शिता आई है। राजनीतिक दलों को मिलने वाले नकद व गुप्त चंदे का चलन थम गया है। चंदे पर कर अवलोकन और ऑडिट से निगरानी की जा सकती है।दानकर्ताओं को हर प्रकार के उत्पीड़न से सुरक्षा दी गई है।
नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पहली बार चुनाव आयोग की सलाह पर कैश में डोनेशन के रूप में 2,000 रुपये से ज्यादा देने पर रोक लगा दी। पहले 20 हजार तक कैश में डोनेशन दी जा सकती थी। गोयल ने आगे लिखा, भाजपा एकमात्र पार्टी है जिसने इलेक्टोरल बांड्स के माध्यम से सुनिश्चित किया है कि जो भी पैसा राजनीति में आये, वह बैंक के माध्यम से आए, उसका केवाईसी भी हो। वर्षों तक जिन पार्टियों में भ्रष्टाचार का पैसा चंदे के रूप में लेकर जो व्यक्ति अमीर हुए हैं, आज उन्हें जब चोट लग रही तो वे उल्टा भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं। आज ईमानदारी का पैसा राजनीति में आया है। इलेक्टोरल बांड्स का सिर्फ वही लोग विरोध कर रहे हैं, जो काले धन में विश्वास रखते हैं।