सूत्रों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष पद किसे मिले, इसे लेकर अभी तीनों दलों में आमराय नहीं बन सकी है। इसके अलावा शिवसेना के खाते में सीएम पद समेत 16 विभाग आ सकते हैं। इसमें 11 कैबिनेट और 5 राज्य मंत्री जबकि एनसीपी के पाले में उपमुख्यमंत्री पद समेत 15 मंत्रालय होंगे, जिनमें 11 कैबिनेट और 4 राज्य मंत्री आ सकते हैं। इसी तरह कांग्रेस को 12 मंत्रालय, जिनमें 9 कैबिनेट और 3 राज्य मंत्री मिल सकते हैं। कांग्रेस उपमुख्यमंत्री का पद भी चाह रही है।
पार्टी विधायकों से बोले उद्धव
कांग्रेस-एनसीपी के साथ सरकार बनाने की नौबत भाजपा की वजह से आई है। भाजपा ने बाला साहेब को वचन दिया था कि शिवसैनिक मुख्यमंत्री बनेगा। उसने अपना वादा तोड़ा है। दोबारा चुनाव न हो, इसलिए हमें यह फैसला लेना पड़ा।
- उद्धव ठाकरे
नहीं सफल होगा प्रयोग : गडकरी
तीनों दल सत्ता की खातिर एक साथ आ रहे हैं। तीनों दलों का गठबंधन अवसरवादी है। इनमें वैचारिक समानता नहीं है। विपरीत विचारधाराओं वाले ये दल भले ही मिलकर सरकार बना लें लेकिन यह सरकार छह से आठ महीने से ज्यादा समय नहीं चलेगी। देश में पहले भी ऐसे कई प्रयोग बुरी तरह से नाकाम रहे हैं।
- नितिन गडकरी, केंद्रीय मंत्री
कुछ ऐसी है विधानसभा की स्थिति
| कुल सीट |
288 |
| भाजपा |
105 |
| शिवसेना |
56 |
| एनसीपी |
54 |
| कांग्रेस |
44 |
| अन्य |
29 |
शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी की सरकार गठन की कोशिशों के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले गठबंधन को नापाक बताकर राज्यपाल से निर्देश देने की अपील की गई है कि वह इस गठबंधन को सरकार बनाने का न्योता न दें। याचिका सुरेंद्र इंद्र बहादुर सिंह ने दायर की है। याचिका में भारत सरकार सहित महाराष्ट्र की तमाम पार्टियों को प्रतिवादी बनाया है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि एसआर बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश में ‘राजनीतिक पार्टी/पार्टियों के समूह’ के भाव स्पष्ट करने की जरूरत है।