कट्टर हिंदुत्व के लिए पहचानी जाने वाली शिवसेना के तेवर में काफी बदलाव दिखने लगा है। शिवसेना के दक्षिण मुंबई विभाग प्रमुख पांडुरंग सकपाल ने मुस्लिम बच्चों के लिए अजान पठन स्पर्धा के आयोजन की तैयारी की थी। लेकिन इस पर जब विपक्षी दल भाजपा ने शिवसेना को घेरा तो विवाद बढ़ता देख उन्होंने यूटर्न ले लिया।
दक्षिण मुंबई शिवसेना विभाग प्रमुख सकपाल ने छोटे बच्चों के लिए अजान प्रतियोगिता आयोजित करने की तैयारी की थी। इसकी भनक मिलते ही मुंबई भाजपा प्रभारी विधायक अतुल भातखलकर ने शिवसेना की जमकर खिंचाई की। उन्होंने कहा कि अब शिवसेना को अजान अचानक मीठा लगने लगा है।
शिवसेना इतनी धर्मनिरपेक्ष हो गई है कि एमआईएम के सांसद को असउद्दीन ओवैसी को भी शर्म आ जाए। शिवसेना को अब भगवा झंडा छोड़कर हरा झंडा धारण करना शेष रह गया है। इसके बाद सकपाल ने प्रतियोगिता के मुद्दे से यू टर्न ले लिया। उन्होंने कहा कि मैने शिवसेना के पदाधिकारी शकील अहमद को अजान स्पर्धा के आयोजन के लिए सुझाव दिया था।
इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन मीडिया में मेरे बयान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सकपाल ने कहा कि यदि अजान स्पर्धा का आयोजन होता भी है तो मैं वहां पर नहीं जाऊंगा। वहीं, शिवसेना प्रवक्ता तथा प्रदेश के परिवहन मंत्री अनिल परब अजान के आयोजन से अपना पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि मुझे इस स्पर्धा के बारे में कोई जानकारी नहीं है।
शिवसेना ने लिया था अजान प्रतियोगिता के खर्च का जिम्मा
दक्षिण मुंबई शिवसेना विभाग प्रमुख सकपाल ने अजान प्रतियोगिता में खर्च की जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा था कि इस प्रतियोगिता में जो बच्चों को पुरस्कार दिया जाएगा। उसका खर्च शिवसेना की ओर से वहन किया जाएगा। इससे पहले उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि अजान की अवाज में मिठास होती है।
मुझे अजान को बार-बार सुनने का मन करता है। इसलिए मैंने शिवसेना के उपविभाग प्रमुख शकील अहमद को अजान स्पर्धा का आयोजन करने को कहा है। हर धर्म ग्रंथ में मानवता की सीख दी गई है। ठाकरे सरकार के मंत्रिमंडल में हर धर्म के लोग हैं। हम भाईचारा चाहते हैं।