सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिले अपने विशेष अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्रेटर नोएडा के हजारों करोड़ रुपये के ‘बाइक बोट’ और ‘ग्रैंड वेनिस मॉल’ घोटालों में दर्ज अलग-अलग प्राथमिकी को एक साथ मिलाने का आदेश दिया। जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने एक ही मामले में अलग-अलग सुनवाई को जनहित में न पाते हुए यह आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में दोनों घोटालों के आरोपियों ने कई याचिकाएं देकर जमानत की मांग के अलावा सभी मामलों की एक साथ व घटना वाले इलाके में एक जगह सुनवाई जैसी राहतों की मांग की थी। पीठ ने कहा, याचिकाओं में कई तरह की राहत मांगी गई है लेकिन सभी पक्षों के वकील आमतौर पर इस पर सहमत हैं कि बाइक बोट घोटाले की अलग-अलग प्राथमिकी को मुख्य प्राथमिकी के साथ जोड़ दिया जाए जो कि यूपी के गौतमबुद्ध नगर के दादरी थाने में दर्ज है। हमारा भी मानना है कि अलग-अलग सुनवाई व्यापक जनहित में नहीं है इसलिए पीठ इन प्राथमिकियों को जोड़ने का आदेश देती है।
बाइक टैक्सी और प्लॉट का लालच देकर ठगा था
बाइक बोट घोटाले में 100 से अधिक मामले पुलिस में दर्ज कराए गए हैं। घोटालेबाजों ने करीब 2 लाख लोगों को बाइक टैक्सी के जरिये मोटी कमाई का लालच देकर 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कंपनी में कराया था और सारा पैसा डकार गए। इसी प्रकार ग्रैंड वेनिस मॉल के घोटालेबाजों ने प्लॉट का लालच देकर कई लोगों से लाखों रुपये का निवेश करवाया था। इस मामले में करीब 46 एफआईआर दर्ज हैं।