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बिहार: क्या है नीतीश की ‘हर घर नल का जल’ योजना, इसे लेकर विवाद क्यों है?

Thu, 23 Sep 2021 06:45 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

बिहार में नीतीश सरकार की 'हर घर नल का जल' योजना में कथित घाटाले को लेकर राज्य में सियासी पारा चढ़ चुका है। ‘सुशासन बाबू’ के राज में इसे लेकर चर्चाएं गरम हैं।
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तारकिशोर प्रसाद - फोटो : ANI
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विस्तार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की थी ‘हर घर नल का जल’। 2018 में यूनीसेफ ने इस योजना की तारीफ भी की थी। लेकिन इस योजना को लेकर नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद घेरे में आ गए हैं। कहा जा रहा है कि इस योजना से निश्चित तौर पर कई घरों को फायदा हुआ है लेकिन नेताओ को भी कम फायदा नहीं हुआ
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एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि कथित तौर पर कटिहार समेत राज्य के 20 जिलों में की गई पड़ताल में यह सामने आई है कि राज्य के उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद की बहू पूजा कुमारी, उनके साले प्रदीप कुमार भगत और अन्य करीबी संतोष कुमार, प्रशांत चंद्र जायसवाल व ललित किशोर प्रसाद को नल जल योजना में 53 करोड़ का ठेका दिया गया।

बिहार भाजपा की सफाई-जब विधायक थे तब मिला था ठेका
रिपोर्ट के मुताबिक ठेका के जरिए फायदा लेने वालों में सबसे पहला नाम उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद का है, लेकिन नेताओं की सूची में राज्य के जेडीयू और भाजपा के कुछ और नेताओं के नाम भी शामिल है। भाजपा के बिहार इकाई के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने इस मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा कि ये ठेके ताराकिशोर प्रसाद को तब मिले थे जब वे विधायक थे और उप मुख्यमंत्री बनने के पहले ही सारा काम कर लिया गया। घोटाले की बात सुनते ही आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर हमला बोल दिया है और उनके इस्तीफे की मांग की है। वहीं इस घोटालने पर राज्य सरकार ने कहा है कि वह "बोली लगाने और निविदा की प्रक्रिया" की जांच करेगी।
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क्या है ‘हर घर नल का जल’ योजना
इस योजना का मकसद बिहार के सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाना है। इस योजना के तहत सुबह, दोपहर और शाम दो-दो घंटे पेयजल की आपूर्ति की जाती है। नीतीश सरकार ने सितंबर 2016 में आधिकारिक तौर पर इस योजना की शुरुआत की थी। इस योजना से अब तक 152.16 लाख नल कनेक्शनों को पेयजल उपलब्ध कराया है।

यह केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत प्रदान किए गए 8.44 लाख कनेक्शन और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के माध्यम से 2.32 लाख कनेक्शन से अलग है। सरकार का दावा है कि इस परियोजना का अब तक 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। नीतीश कुमार ने 2015 विधानसभा चुनाव में अपने घोषणा पत्र में सात निश्चय किया था उसमें से एक निश्चय हर घर को स्वच्छ नल का जल देना भी था।

अपनी सरकार की पीठ थपथपा चुके हैं नीतीश 
2015 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चुनावी वादे के रूप में जो योजना शुरू हुई उसे पैमाने और पहुंच दोनों के मामले में उनकी सरकार की सबसे बड़ी कल्याणकारी पहल मानी जा रही थी। सरकारी दावे में इस योजना को बहुत सफल बताया जा रहा था। इसी साल जनवरी में नीतीश कुमार ने इस योजना की कथित सफलता पर अपनी सरकार की पीठ थपथपाई थी। उन्होंने कहा था पहले राज्य में दो प्रतिशत लोगों के घर तक ही नल के माध्यम से पेयजल उपलब्ध था। हमने सभी को शुद्घ पेयजल उपलब्ध कराने के लिये हर घर नल का जल योजना की शुरुआत की। अब 95 प्रतिशत से अधिक लोगों के घर तक इस योजना के तहत नल से शुद्घ पेयजल मिल रहा है। 

धांधली की शिकायत पहले भी मिल रही थी
हालांकि मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में लापरवाही, धांधली और अनियमितताएं की खबरें पहले भी लगातार आ रही थीं। बिहार के जानेमाने आरटीआई कार्यकर्ता शिवप्रकाश राय को मिली सूचना के अधिकार कानून के तहत इस बात का खुलासा हुआ था कि ज्यादातर मुखिया पर कमीशनखोरी से लेकर प्रोजेक्ट को पूरा कराने में लेट-लतीफी बरतने, काम की खराब गुणवत्ता जैसे गंभीर आरोप थे। जब इसकी जांच हुई तो आरोप सही पाए गए। 

खुलासे के बाद इसी साल जनवरी में ऐसे मामलों पर सरकार ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की थी। जिसके तहत प्रदेश के 373 मुखिया पर एफआईआर  दर्ज किया गया था। वहीं कई ठेकेदारों, सुपरवाइजर व पंचायत सचिवों पर भी प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश जारी किया गया था। इस मामले को पहले ही सार्वजनिक करने वाले पूर्व मंत्री और अब राष्ट्रीय जनता दल के नेता रामप्रकाश महतो का कहना है कि जब भी इससे संबंधित शिकायत की गयी तो बिहार पुलिस ग्रामीणों को धमका देती थी। 

विपक्ष को मुद्दा मिला
इस रिपोर्ट के आने के बाद विपक्ष को नीतीश सरकार के खिलाफ हमला करने का एक मौका मिल गया है वहीं नीतीश कुमार के कथित भ्रष्टाचार रहित शासन की इमेज को तगड़ा झटका लगा है। इससे नीतीश कुमार के गुड गर्वनेंस के दावे की भी पोल खुली है। तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को चुनौती दी है कि वे प्रसाद के खिलाफ कार्रवाई करके दिखाएं।

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी प्रसाद के इस्तीफे की मांग करते हुए ‘इसे हर नेता ठेका योजना’ करार दिया है। इस  योजना को प्रमुखता से मुद्दा बनाकर ही नीतीश कुमार ने पिछला विधानसभा चुनाव लड़ा था और माना जा रहा है कि अब  राजद अगले कई चुनावों तक कथित घोटाले की बात को मुद्दा बनाएगी।
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