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छात्रों का सवाल: इंटरव्यू होने के बाद भी नहीं मिल रही नियुक्ति, तो नई नौकरियों का एलान क्यों कर रही सरकार

Thu, 01 Apr 2021 02:22 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • बिहार कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर 2019 में निकली थी नियुक्ति, इंटरव्यू होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली नियुक्ति
  • बार-बार की नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरने में अभ्यर्थियों को होता है भारी आर्थिक नुकसान
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नौकरी की तलाश में छात्र - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक कर लगभग साढ़े पांच हजार नई नौकरियों का एलान किया है। लेकिन नये पदों के एलान के बाद भी राज्य के युवाओं में ज्यादा उत्साह नहीं है। इसका वजह है कि नई नौकरियों का एलान तो हो जाता है, लेकिन उनकी बहाली प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती, जिससे युवाओं में और ज्यादा निराशा बढ़ती है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए 2019 में विज्ञापन निकाला गया था। इस परीक्षा में चयनित छात्रों का इंटरव्यू तक हो गया है, लेकिन अभी तक किसी छात्र को नौकरी नहीं मिल पाई है।

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अभ्यर्थियों का सवाल है कि जब नौकरी नहीं देनी होती है, तो सरकारें नई नौकरियों का एलान ही क्यों करती हैं? नौकरियों के एलान होने के बाद वे पैसा खर्च कर बड़ी उम्मीद में फॉर्म भरते हैं, नियुक्ति प्रक्रिया से गुजरते हैं, लेकिन लंबे समय के बाद भी जब चयन प्रक्रिया पूरी नहीं होती तो उनके हाथ निराशा ही हाथ लगती है।  

अभ्यर्थी ने बताया

परीक्षा और इंटरव्यू देकर नौकरी का इंतज़ार कर रही पीएचडी स्कॉलर प्रीती सिंह ने अमर उजाला को बताया कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर ने 2019 में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरियों हेतु विज्ञापन निकाला था। इस मामले में परीक्षा भी आयोजित हुई और पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में इसका साक्षात्कार भी हो गया। लेकिन छह माह से ज्यादा का समय बीत चुका है, अभी तक विश्वविद्यालय ने किसी भी छात्र को नियुक्ति नहीं दी है।

यह हाल तब है कि जब कृषि को राज्य सरकार अपनी विशेष प्राथमिकता बताती रही है। छात्रों ने बताया है कि अकेले इसी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर और वैज्ञानिकों के 40 फीसदी से ज्यादा पद रिक्त हैं। अगर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और विज्ञानिक ही नहीं होंगे, तो नये छात्रों को कौन पढ़ायेगा। इस प्रकार नये छात्रों का भविष्य भी अंधेरे में है।

कई नौकरियों के भी परिणाम अटके

छात्रों का आरोप है कि यह अकेला मामला नहीं है जहां विज्ञापन निकालने के साल-दो साल बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे अनेक मामले हैं जहां छात्र भटक-भटक कर नौकरियों के इम्तिहान दे रहे हैं, लेकिन उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और बैंकिंग सेक्टर से लेकर राज्य सरकार के अधीन आने वाले अनेक विभागों में यही स्थिति बनी हुई है।   

राजद का आरोप

राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा ने कहा कि यह बिहार का दुर्भाग्य है कि यहां भारी संख्या में नौकरियों में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। सरकार पहले तो नई नौकरियों का रास्ता साफ नहीं करती और जब नई नौकरियों का एलान हो भी जाता है तो कई बार वह क़ानूनी पचड़ों में फंसकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में उलझकर रह जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य के युवाओं के भविष्य के प्रति गंभीर नहीं है।

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