बिहार विधानसभा चुनाव से जुड़ी हमारी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज बात भागलपुर सीट की करेंगे। भागलपुर सीट जो कभी भाजपा के अश्विनी चौबे का गढ़ हुआ करती थी। पिछले तीन चुनाव से यहां से कांग्रेस के अजीत शर्मा जीत हासिल कर रहे हैं। भागलपुर विधानसभा सीट की एक और खास बात है कि यहां की जनता ने जिसे चुना उसे कम से कम दो बार जरूर चुना है।
बिहार के 38 जिलों में से एक जिला भागलपुर है। भागलपुर जिला 3 अनुमंडल और 16 ब्लॉक में बंटा है। इस जिले में सात विधासभा सीटें आती हैं। इनमें बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती (एससी), कहलगांव, भागलपुर, सुल्तानगंज, नाथनगर शामिल हैं। आज ‘सीट का समीकरण’ सीरीज में भागलपुर विधानसभा सीट की बात करेंगे। भागलपुर सीट पर 1952 में पहला चुनाव हुआ था।
1952: पहले तीन चुनाव में कांग्रेस को मिली जीत
भागलपुर सीट से पहली जीत कांग्रेस को मिली। कांग्रेस के उम्मीदवार सतेंद्र नारायण अग्रवाल ने भारतीय जनसंघ के गौरी शंकर प्रसाद को 7,446 वोट से हराया। उन्हें कुल 10,461 वोट मिले थे। वहीं, गौरी शंकर को मात्र 3,015 वोट मिले थे।
1957 के चुनाव में भी सतेंद्र नारायण को जीत मिली। इस बार उन्होंने जनसंघ के सीता राम किशोरपुरी को 4,082 वोट से हराया। इस चुनाव में सतेंद्र को 9,815 वोट मिले। वहीं, सीता राम को 5,733 वोट से संतोष करना पड़ा।
1962 के चुनाव में सतेंद्र नारायण ने जीत की हैट्रिक लगाई। इस बार उन्हें 9,030 वोट से जीत मिली। उन्हें कुल 17,190 वोट मिले। वहीं, जनसंघ के सीता राम को 8,160 वोट मिले थे।
1967: जनसंंघ को मिली पहली जीत
1980: 13 साल बाद कांग्रेस की वापसी
1980 के चुनाव में भागलपुर सीट से कांग्रेस ने 13 साल बाद वापसी की। इस चुनाव में कांग्रेस के शियो चंद्र झा ने जीत हासिल की। 1985 के चुनाव मेंं यहां से झा को जीत मिली। 1980 में शियो चंद्र झा ने जनता पार्टी के बनारसी प्रसाद गुप्ता को 3,313 वोट से हराया था। शियो को कुल 24,347 वोट मिले थे और बनारसी को 21,034 वोट मिले थे। वहीं तात्कालिन विधायक विजय मित्रा तीसरे नंबर पर रहे।
1985 के चुनाव में शियो चंद्र की जीत के आंकड़े में बड़ी बढ़त हुई। इस चुनाव में उन्होंने जनता पार्टी के फैयाज भागलपुर को 38,756 वोट से हराया। शियो चंद्र को कुल 51,755 वोट मिले थे। वहीं, फैयाज को मात्र 12,996 वोट मिले थे।
1990: भाजपा ने खोला खाता
1990 के चुनाव में विजय मित्रा ने भाजपा से अपनी किस्मत अपनाई और जीत हासिल की। इसी जीत के साथ विजय ने भागलपुर सीट पर पांचवीं बार जीत दर्ज की। इस चुनाव में विजय मित्रा ने कांग्रेस के इस्माइल खान को 22,137 वोट से हराया। विजय को कुल 41,000 वोट मिले। वहीं, इस्माइल को 18,863 वोट मिले।
1995: अश्विनी चौबे का उदय
2014: उपचुनाव में अजीत शर्मा को मिली जीत
2014 लोकसभा चुनाव में अश्विनी चौबे ने बक्सर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इस कारण से भागलपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने पड़े। इस उपचुनाव में दो बार हार का सामना कर चुके कांग्रेस के अजीत शर्मा ने जीत हासिल की। उन्होंने भाजपा के नभय चौधरी को 17,229 वोट से हराया। अजीत को कुल 63,753 वोट मिले थे। वहीं, नभय को 46,524 वोट मिल थे।
2015: अजीत शर्मा के जीत का सिलसिला जारी
2015 और 2020 के चुनाव में भी अजीत शर्मा ने जीत दर्ज की। 2015 के चुनाव में अजीत ने भाजपा के अर्जित शाश्वत चौबे को 10,658 वोट से हराया। अजीत को कुल 70,514 वोट मिले थे। वहीं, अर्जित को 59,856 वोट मिले थे।
2020 के चुनाव में अजीत शर्मा ने 1,419 वोट से जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्हें 65,502 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा के रोहित पांडे को 64,389 वोट मिले।
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