जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में उरी से भी बड़ा आतंकी हमला हुआ है। हमले में 42 से ज्यादा जवानों के शहीद होने की आशंका है। हालांकि अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह हमला जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सीआरपीएफ के काफिले को निशाना बनाकर किया गया है। इस काफिले में 2500 जवान शामिल थे। इससे पहले 2016 में भी ऐसा ही हमला हुआ था। जब उरी हमले में 18 जवान शहीद हुए थे। जानिए कैसा हुआ था उरी हमला और भारतीय सेना ने कैसे लिया था इसका बदला।
उरी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया था जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी। बता दें कि आतंकियों की ओर से उरी सेक्टर में जवानों पर हुए हमले की आग उस दिन बुझी जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सरजमीं में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।
तब भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया था कि अगर उसके नापाक मंसूबे नहीं थमे तो अंजाम इससे भी ज्यादा भयानक हो सकता है। भारतीय सेना ने इस दौरान आतंकियों को कैंप बर्बाद किए और कई को मौत के घाट उतारा। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देना और फिर सुरक्षित वापस लौटना सेना के जवानों के लिए आसान नहीं था।
सर्जिकल स्ट्राइक टीम की अगुवाई करने वाले सेना के एक मेजर ने एक साल बाद प्रकाशित अपनी किताब 'इंडियाज मोस्ट फियरलेस: ट्रू स्टोरीज ऑफ मॉडर्न मिलिटरी हीरोज' में दुश्मनों के ठिकानों को तबाह करने की पूरी कहानी बयां की थी। उन्होंने बताया हालात ऐसे थे कि गोलियां कान के पास से गुजर रही थीं। चौंका देने वाली बात है कि भारतीय सेना जिस रास्ते पाकिस्तान में घुसी वहां से वापस आना संभव नहीं था। सैनिकों ने दूसरा रास्ता चुना और माना जाता है कि इसी वजह से वे वापस लौट पाए।
उस रात की कहानी कुछ ऐसी थी कि सेना ने करीब 12.30 बजे कार्रवाई शुरू की और वह बृहस्पतिवार सुबह 4.30 तक चली। एलओसी के 2 से 3 किमी दायरे में मौजूद आतंकियों के सात ठिकानों को निशाना बनाया गया। खास बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी की गई थी।
नौ पैराकमांडो की पांच क्रैक टीम ने कार्रवाई को सफल बनाया। पीओके के भिंबर, हॉटस्प्रिंग, तत्तापानी, केल, लीपा सेक्टरों में सैन्य कार्रवाई चली। ऊधमपुर के उत्तरी कमान से 200 पैराकमांडो ने हेलिकॉप्टर से उड़ान भरी और इन ठिकानों पर उतर कर मोर्चा संभाला।
सैन्य कार्रवाई में बड़ी संख्या में आतंकियों और उनका समर्थन करने वाले पाक सैनिकों को ढेर किया गया। इसके बाद सुबह 4.30 बजे सुरक्षित अपने ठिकाने पर लौट आए। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद रक्षा और विदेश मंत्रालयों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया, जिसमें मिलिट्री ऑपरेशन्स के तत्कालीन महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने बताया कि 28 सितंबर की रात को भारतीय सैन्य बलों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मौजूद आतंकी गुटों के ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया।