फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

COP28: 'कोयले पर रोक लाने का भारत ने किया था विरोध', कॉप-28 की बैठक का जिक्र करते हुए बोले भूपेंद्र यादव

Mon, 08 Jan 2024 10:43 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक सम्मेलन के दौरान पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने पिछले साल दुबई में आयोजित कॉप-28 की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि विकसित राष्ट्र कोयले पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन भारत ने ग्लोबल साउथ का ध्यान रखते हुए इसका विरोध किया। 
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पिछले वर्ष दिसंबर माह में दुबई में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के दौरान विकसित देशों ने कोयले पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की तो भारत ने ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा करते हुए यह लड़ाई लड़ी। 'मोदी: एनर्जाइजिंग ए ग्रीन फ्यूचर'  पुस्तक का विमोचन के अवसर पर पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार अमीर देशों को ग्लोबल साउथ के विकास में बाधा डालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। 
विज्ञापन


समारोह में पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव ने दुबई में हुई कॉप-28 की बैठक से जुड़ी बातों को साझा करते हुए कहा कि कोयले पर प्रतिबंध को लेकर विकसित राष्ट्र एक हो गए थे, लेकिन भारत ने ग्लोबल साउथ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसकी लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि भारत ने उस वक्त तर्क दिया था कि अगर जीवाश्म ईधन सब्सिडी को छोटे देशों में गरीबी उन्मूलन से जोड़ा जाता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता हैं। 

दुबई में एक मसौदा समझौते के चैप्टर में कोयले को लेकर कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया था, हालांकि यह वैकल्पिक था। जिसमें लिखा था कि कोयले से बिजली उत्पादन पर रोक लगाई जाएं। मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी देश ऊर्जा पहुंच के बिना विकास नहीं कर सकता हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने केलिए हरित विकास हासिल करने पर जोर दे रहा हैं।
विज्ञापन


बीते माह एक सम्मेलन में पत्रकारों के जवाब देते हुए भूपेंद्र यादव ने कहा था कि भारत अपने लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जब तक हम विकसित देश का दर्जा हासिल नहीं कर लेते, तब तक कोयला बिजली पर निर्भर रहना होगा। देश केवल तेल और गैस आयात करके अपने लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता हैं। बता दें भारत अपनी लगभग 70 प्रतिशत बिजली उत्पादन के लिए कोयले पर निर्भर है
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें