भीमा-कोरेगांव मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद इतिहासकार रोमिला थापर ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा की है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव मामले की सुनवाई करते हुए पांचों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर एसआईटी जांच की मांग को ठुकरा दिया था।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले पांचों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं प्रो. रोमिला थापर, प्रो. देवकी जैन, प्रो. प्रभात पटनायक, प्रो. सतीश देशपांडे और माया दारूवाला ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस की। मुख्य याचिकाकर्ता रोमिला थापर ने कहा कि उनका उद्देश्य न्यायपालिका का ध्यान अपनी तरफ खींच कर यह जताना था कि राज्य सरकार गैर कानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए का दुरुपयोग कर रही है।