महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में केंद्र सरकार ने कड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मंगलवार को देशभर में ताबड़तोड़ छापे मार माओवादियों से संपर्क रखने के संदेह में करीब 5 वामपंथी विचारकों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार हुए लोगों में वामपंथी समर्थक वरवरा राव और गौतम नवलखा के नाम शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
पुलिस की इस कार्रवाई का मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है। छापेमार कार्रवाई के बाद हुई इन गिरफ्तारियों के खिलाफ रोमिला थापर, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे, माया डार्नल और एक अन्य कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और गौतम नवलाखा की गिरफ्तारी के खिलाफ उच्चतम न्यायालय पहुंचे हैं।
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क्यों मारे गए छापे
ये छापे बीते साल 31 दिसंबर को एल्गार परिषद के एक कार्यक्रम के बाद पुणे के पास कोरेगांव भीमा गांव में दलितों और उच्च जाति के पेशवाओं के बीच हुई हिंसा की घटना के तहत मारे गए हैं।
बीते दो दिन में पलटी बाजी
इससे पहले पुलिस ने इस मामले में जून, 2018 में गिरफ्तार पांच लोगों में एक के ठिकाने से पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश से जुड़ा एक पत्र जब्त किया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की ही तरह मोदी को भी निशाना बनाने की बात कही गई थी। इस पत्र से ही वरवरा राव का नाम सामने आया था। लेकिन मंगलवार को वामपंथी विचारकों के घरों पर हुई छापेमारी कार्रवाई की वजह से इस मामले ने एकबार फिर तूल पकड़ लिया है।
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छापेमारी की यह कार्रवाई पुलिस ने हैदराबाद में कवि वरवरा राव, फरीदाबाद व छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन की कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, दिल्ली में गौतम नवलखा, ठाणे में अरुण फरेरा और मुंबई में बरनोन गोंजालविस के आवासों पर की गई। गोवा में सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे के घर की तलाशी ली गई। वहीं नवलखा को बुधवार तक राजधानी से बाहर नहीं ले जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें घर में ही नजरबंद रखा गया।
रांची में स्टॉन स्वामी के यहां भी छापेमारी की गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी पर यलगार परिषद से संबंध और नक्सलियों के समर्थक होने का संदेह है। पुलिस ने कहा है कि गिरफ्तारी हुए पांच लोगों पर नजर रखी जा रही थी। और एक हफ्ते से उनकी हर एक हरकत पर निगरानी थी।
जून में पांच लोगों को किया गया था गिरफ्तार
जून में सुधीर धावले को मुंबई से, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत व शोमा सेन को नागपुर से और रोना विल्सन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। पुणे के विश्रामबाग थाने में दर्ज मामले के मुताबिक, भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में यलगार परिषद ने आयोजन किया था। आरोप है कि इन पांचों के भाषण के बाद हिंसा भड़की थी। इसमें एक व्यक्ति की मौत के बाद हिंसा और भड़क गई थी।
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पीएम मोदी की हत्या की साजिश का आरोप
भीमा कोरेगांव की हिंसा के आरोपी के घर से एक पत्र मिला था। जिसमें राजीव गांधी जैसे हत्याकांड की साजिश का खुलासा हुआ था।
विपक्ष के निशाने पर सरकार
इस मामले में पुलिस की कार्रवाई पर विपक्ष ने केंद्र सरकार की तीखी आलोचनी की है। कांग्रेस ने कहा है कि ये कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है। सीपीआई महासचिव सीताराम येचुरी ने इस कार्रवाई को अघोषित आपातकाल करार दिया है।
वहीं मायावती ने कहा कि भाजपा यह दावा कर रही है कि ये बुद्धिजीवी पीएम मोदी की हत्या की साजिश रच रहे हैं। यह मुझे गुजरात में हुए फर्जी मुठभेड़ों के उस दौर की याद दिलाता है, जब मोदी की जान को खतरा बताकर कई लोगों का एनकाउंटर कर दिया गया।
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क्या था उस पत्र में जिनकी वजह से हुई गिरफ्तारी
माओवादी विचारकों की गिरफ्तारी महज दो चिट्ठियों के सामने आने के बाद हुई है। एक चिट्ठी को इसी साल की शुरुआत में पुणे पुलिस ने जब्त किया था। ये दोनों पत्र वामपंथी नेताओं द्वारा आदान-प्रदान किए गए। इनमें देश के पूर्व राष्ट्रपति राजीव गांधी की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और गृह मंत्री राजनाथ सिंह की हत्या की योजना की बात कही गई है।
पुलिस का कहना है कि साल 2016 के इस पत्र से पता चलता है कि तीनों नेताओं की हत्या की साजिश के तहत नक्सलियों के बीच विचार-विमर्थ हुआ था। इसके अलावा साल 2017 के एक अन्य पत्र में कहा गया है कि रोड शो के दौरान राजीव गांधी तरह पीएम मोदी पर भी हमला किया जाए।