केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को कहा कि भारत दुनिया के कुछ उन चुनिंदा देशों में शुमार है, जहां सही मायने में कृषि परंपरा की शुरुआत हुई। यही वजह है कि हमारे परंपरागत बीज अपने गुणों और शारीरिक पोषण के लिहाज से सबसे अधिक उपयुक्त माने जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पारंपरिक बीजों के संरक्षण से ही भावी पीढ़ियों को पौष्टिक भोजन मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।
शाह भारतीय बीज सहकारी समिति लि. (बीबीएसएसएल) की तरफ से सहकारी क्षेत्र में उन्नत एवं पारंपरिक बीजोत्पादन विषय पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, भारत को वैश्विक बीज निर्यात के बजार में एक बड़ा हिस्सेदार बनाना एक समयबद्ध लक्ष्य होना चाहिए। आज देश के हर किसान को वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया बीज उपलब्ध नहीं है। इसीलिए हमारी जिम्मेदारी है कि इस विशाल देश के हर किसान के पास प्रमाणित और वैज्ञानिक रूप से तैयार बीज पहुंचे। यही नहीं, पारंपरिक बीजों को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके क्योंकि तभी स्वस्थ्यकर अन्न, फल और सब्जियों का निरंतर उत्पादन संभव होगा। इस काम को भारतीय बीज सहकारी समिति लि. (बीबीएसएसएल) ही बखूबी अंजाम दे सकती है। आने वाले दिनों में भारत में बीज संरक्षण, संवर्धन और अनुसंधान के क्षेत्र मे इसका बड़ा योगदान होगा। इस मौके पर उन्होंने बीबीएसएसएल का लोगो, वेबसाइट और ब्रोशर का अनावरण किया। साथ ही समिति के सदस्यों को सदस्यता प्रमाणपत्र भी वितरित किए।
मुनाफा सीधे किसानों के खाते में जाएगा
उन्होंने कहा, हमारे यहां उत्पादित बीज कमोबेश विदेशी तरीकों से आरएंडडी करके बनाए गए हैं, लेकिन हमारे कृषि वैज्ञानिकों को अगर एक अच्छा प्लेटफॉर्म मिले तो वे विश्व में सबसे अधिक उत्पादन करने वाले बीज बना सकते हैं। कोऑपरेटिव के माध्यम से बीज उत्पादन के साथ जो किसान जुड़ेंगे, उन्हें बीज का मुनाफा सीधे मिलेगा। यही सहकारिता का मूल मंत्र है। उन्होंने कहा कि भारत के घरेलू बीज का वैश्विक बाजार में हिस्सा सिर्फ 4.5 प्रतिशत है, इसे बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए बहुत काम करना होगा।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
शाह ने कहा कि यह सहकारी समिति देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ देश को बीजोत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और बीजों के वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद करेगी। इसका सबसे बड़ा फायदा छोटे किसानों, महिलाओं और युवाओं को ही होगा।