यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अजय भूषण पांडेय ने कहा कि एईपीएस के जरिए सरकारी लाभ और छूट की राशि सीधे लाभार्थियों के हाथों में पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। इसके जरिए सेंधमारी करने वालों और बीच में पैसा खाने वालों पर लगाम लगेगी।
इसमें लाभार्थी को खाता संख्या या अन्य कोई विस्तार बताने की जरूरत नहीं होती। वह सिर्फ बायोमीट्रिक सत्यापन देता है और उसे सरकारी लाभ या छूट प्राप्त हो जाती है। प्राधिकरण ने कहा है कि इस माध्यम के जरिये प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना के तहत आधार का प्रयोग मान्य है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक आधार का उपयोग डीबीटी में किया जा सकता है।
यूआईडीएआई का कहना है कि एईपीएस के जरिए ग्रामीण या दूरदराज इलाकों में रहने वाले लाभार्थियों की पूरी सहायता होती है। मौजूदा समय 14 करोड़ से भी ज्यादा एईपीएस लेनदेन प्रत्येक माह 8 करोड़ लोग कर रहे हैं। इसी तरह मनरेगा कर्मचारियों को भी उनके गांवों तक एईपीएस के जरिए लाभ और छूट मुहैया करायी जा रही है। ऐसे में बैंक इस सेवा को जारी रखेंगे।
हाल ही में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि आधार के जरिए सरकार 90 हजार करोड़ रुपये हर साल बचा रही है। यह भारी राशि सेंधमारी में चली जाती थी और सरकार कुछ नहीं कर पाती थी।