तिवारी जी मुख्यमंत्री थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गंगा पर अभियान शुरू किया था। विधानसभा में मैं गंगा अभियान पर बोल रहा था। जाहिर है कि विपक्ष में होने के नाते मुझे सवाल उठाना ही था। तिवारी जी बैठे हुए बीच-बीच में नोट कर रहे थे।
सदन उठा तो उन्होंने अपने सहायक से मुझे अपने कक्ष में बुलवाया। मैं गया और उनका चरणस्पर्श किया। मुझे लग रहा था कि वह नाराज होंगे। पर, उल्टा हुआ। उन्होंने मिठाई मंगवाई और खिलाई। स्नेहपूर्वक बैठाया। कहा कि तुम पढ़ते ही नहीं हो बल्कि ठीक से पढ़ते हो। बहुत अच्छे बिंदु उठाए। नए विधायक हो। ऐसे ही सीखते रहो। क्षेत्र में लोगों के काम कराओ। विकास कराओ। कभी कोई समस्या हो तो नि:संकोच हमारे पास आ जाना।
फिर पूछा कि इस समय भी कोई काम हो तो बताओ। मुझे अपने जिले उन्नाव की वह सड़क याद आ गई जो मवई को जाती थी और उस पर चलना मुश्किल था। मैने तुरंत नाम बताया। तिवारी जी ने उन्नाव के तत्कालीन जिलाधिकारी को फोन किया और कहा, ‘आपके यहां के दीक्षित जी हैं तो नौजवान लेकिन काफी अध्ययनशील हैं। उत्साही और उदीयमान विधायक है। क्षेत्र में इस नौजवान का प्रभाव बढ़ना चाहिए। इस समय धन न मेरे पास है और न आपके पास होगा। पर, इनकी बताई हुई सड़क तुरंत बनना इसलिए जरूरी है क्योंकि लोगों को इस नौजवान विधायक पर भरोसा बढ़े। धाक जमे। इससे इनमें विकास का काम कराने का उत्साह पैदा होगा। सरकार की साख तो बनेगी ही बनेगी। धन की मैं बाद में व्यवस्था करा दूंगा।’ अगले दिन मैं जब अपने क्षेत्र में गया तो देखा कि मवई की सड़क निर्माण का काम शुरू हो चुका था।
- हृदय नारायण दीक्षित, (विधानसभा अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश