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Bajrang Dal: आपदा में मदद से रक्तदान तक करने वाले संगठन का विवादों से भी नाता, कब-कब हुई इस पर बैन की मांग?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Wed, 03 May 2023 06:11 PM IST

सार

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषणापत्र में कांग्रेस ने प्रतिबंधित पीएफआई की बजरंग दल से करते हुए कहा कि वह ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाएगी। कांग्रेस की इस घोषणा का बजरंग दल के मातृ संगठन विश्व हिंदू परिषद ने कड़ा विरोध किया है।
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कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने बजरंग दल को बैन करने का वादा किया - फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी किया। इसमें बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। अब इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। संगठन ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी के विरोध में बजरंग दल ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन का भी एलान किया। कभी हिंदू चेतना जागृति के लिए बना यह संगठन पहले भी कई बार विवादों में रहा है। 

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने की बात क्यों कही? बजरंग दल किन विवादों में रहा है? कर्नाटक में इस संगठन से जुड़े बड़े विवाद क्या हैं? क्या कभी पहले भी इस पर प्रतिबंध लगा है? कांग्रेस के वादे पर बजरंग दल क्या बोला? भाजपा ने इस वादे पर कैसे हमला किया? आइये जानते हैं…
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कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस ने बजरंग दल को बैन करने का वादा किया - फोटो : AMAR UJALA
कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार को कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी किया। इसमें बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। अब इसको लेकर विवाद शुरू हो गया है। संगठन ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसी के विरोध में बजरंग दल ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन का भी एलान किया। कभी हिंदू चेतना जागृति के लिए बना यह संगठन पहले भी कई बार विवादों में रहा है। 

कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने की बात क्यों कही? बजरंग दल किन विवादों में रहा है? कर्नाटक में इस संगठन से जुड़े बड़े विवाद क्या हैं? क्या कभी पहले भी इस पर प्रतिबंध लगा है? कांग्रेस के वादे पर बजरंग दल क्या बोला? भाजपा ने इस वादे पर कैसे हमला किया? आइये जानते हैं…

कर्नाटक कांग्रेस घोषणा पत्र - फोटो : SOCIAL MEDIA
कांग्रेस ने घोषणा पत्र में बजरंग दल पर बैन लगाने की बात क्यों कही? 
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र जारी कर दिया है। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की तुलना विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल से करते हुए कहा कि वह ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाएगी, जो दुश्मनी या नफरत को बढ़ावा देते हैं। घोषणा पत्र में कहा गया कि अगर पार्टी राज्य में सत्ता में आती है, तो नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने सहित कानून के अनुसार निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
 

विहिप के अंतरराष्ट्रीय जॉइंट जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुरेंद्र जैन - फोटो : Amar Ujala
बैन करने के कांग्रेस के वादे पर बजरंग दल क्या बोला?
कांग्रेस की इस घोषणा का बजरंग दल के मातृ संगठन विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने कहा है कि एक राष्ट्रविरोधी संगठन पीएफआई से बजरंग दल की तुलना दुर्भाग्यपूर्ण है। विहिप के शीर्ष नेता डॉ. सुरेंद्र जैन ने कहा है कि कांग्रेस ने एक राष्ट्रभक्त संगठन बजरंग दल की तुलना राष्ट्रविरोधी संगठनों से कर अपनी मानसिकता का परिचय दिया है। 

विश्व हिंदू परिषद की यात्रा को सुरक्षा देने के लिए हुआ था गठन
अक्टूबर 1984 की बात है। विश्व हिंदू परिषद की पहली धर्म संसद में मंदिर आंदोलन की शुरुआत हुई। इसके साथ ही राम जानकी रथयात्रा के नाम से नियमित रूप से शोभा यात्रा निकालने की शुरुआत हुई। इसका मकसद था कि लोगों को हिंदुत्व के बारे में अधिक से अधिक बताया जाए। 

यात्रा के आयोजकों को धमकियां मिलीं, तो विश्व हिंदू परिषद ने यूपी सरकार से यात्रा को सुरक्षा देने की मांग की। लेकिन, यूपी सरकार ने सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। तब कुछ युवाओं ने अपनी ओर इस यात्रा को सुरक्षा प्रदान करने का एलान कर दिया। इन युवाओं के संगठन को बजरंग दल नाम मिला।

 

बजरंग दल के लोग आपदा में मदद करते हुए - फोटो : SOCIAL MEDIA
विवादों से इतर किस तरह के काम से चर्चित है बजरंग दल?
भूकम्प, बाढ़ जैसी आपदा के वक्त सेवा कार्यों में भी बजरंग दल के कार्यकर्ता हिस्सा लेते हैं। दल की वेबसाइट के मुताबिक दैवीय आपदा पर सहायता शिविर, दुर्घटना के समय सहायता के लिए बजरंग दल हमेशा तत्पर रहता है।

संगठन से जुड़े कार्यकर्ता अलग-अलग जगहों पर रक्त दान शिविर का भी आयोजन करते रहते हैं। 2014 में बजरंग दल ने एक ही दिन 82,000 यूनिट रक्तदान कराने का दावा किया था।  वृक्षारोपण, जल संरक्षण, स्वास्थ शिविर का भी आयोजन संगठन करता है।

बजरंग दल का विवादों का रिश्ता कितना पुराना?
कर्नाटक में बजरंग दल पहली बार नहीं चर्चा में है, इससे पहले यह अलग-अलग कारणों से सुर्खियों में रहा है। तटीय कर्नाटक क्षेत्र में अक्तूबर 2008 में चर्चों में हुए हमलों में संगठन का नाम आया था। इसके बाद, बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने हमलों की जांच के लिए न्यायमूर्ति बीके सोमशेखर की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया था। सितंबर 2009 में तत्कालीन येदियुरप्पा सरकार के समक्ष रखी गई एक अंतरिम रिपोर्ट में आयोग ने बजरंग दल जैसे दक्षिणपंथी गुटों को शामिल होने के बात कही थी।  

अल्पसंख्यकों पर हमले के आरोप 
अप्रैल, 2022: कर्नाटक के शिमोग्गा जिले में बजरंग दल के पांच कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर हलाल मांस बेचने के लिए एक मुस्लिम व्यापारी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

जनवरी, 2022: कर्नाटक के गादग जिले में एक 20 वर्षीय मुस्लिम युवक की मौत हो गई। युवक कथित रूप से बजरंग दल के सदस्यों सहित एक समूह द्वारा हुए हमले के दौरान लगी चाकू की चोट से घायल हो गया था।

नवंबर, 2021: बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के एक समूह ने कथित तौर पर बेलूर शहर के जीसस प्रेयर हॉल में एक प्रार्थना सभा को इस आधार पर रुकवाया कि वहां जबरन धर्मांतरण हो रहा था।

अप्रैल, 2021: बजरंग दल के लोगों ने कथित रूप से मंगलुरु में एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया और उसे चाकू मार दिया। व्यक्ति अपनी हिंदू महिला मित्र के साथ एक बस में बेंगलुरु जा रहा था। मंगलुरु शहर पुलिस ने बजरंग दल के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज किया।

जून, 2018: बेल्लारी पुलिस ने बजरंग दल के तीन कार्यकर्ताओं को एक शख्स की संदिग्ध मौत के मामले में गिरफ्तार किया। इन्होंने मृतक पर आरोप लगाया था कि वह अवैध रूप से मवेशियों की तस्करी कर रहा था।

मार्च, 2013: उडुपी जिले के मूडुबेले में एक ईसाई प्रार्थना घर पर हमले के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा कथित रूप से हमला किया गया, पुलिस के मुताबिक इस घटना में सात लोग घायल हो गए थे। कार्यकर्ताओं ने वहां धर्मांतरण की गतिविधियां चलने की बातें कही थीं।

क्या सिर्फ कर्नाटक में ही विवादों में रहता है बजरंग दल?
कर्नाटक ही नहीं देश के दूसरे राज्यों में भी अलग-अलग घटनाओं में बजरंग दल का नाम आता रहा है। हर साल वैलेंटाइन डे पर देशभर में युवा जोड़ों के साथ अभद्रता करने के आरोप बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर लगते हैं। 2008 में ओडिशा में धार्मिक हिंसा हुई। इसमें भी बजरंग दल का नाम आया। हिंसा के बाद दिग्गज भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बजरंग दल जैसे संगठनों को हिंसा से खुद को दूर रखने की सलाह दी थी। 

15 अगस्त 2022 को, 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुई बिलकिस बानो गैंगरेप मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए 11 लोगों को गुजरात सरकार ने गोधरा जेल से रिहा कर दिया था। उनकी रिहाई के बाद, बलात्कारियों को कथित तौर पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने माला पहनाकर स्वागत किया।

narsimha rao - फोटो : Social media
क्या कभी बजरंग दल पर प्रतिबंध भी लगा?
1984 में इस संगठन के गठन के बाद इसका पहला बड़ा विवाद राम मंदिर आंदोलन से जुड़ा हुआ है। विवादित बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद 1992 में नरसिम्हाराव वाली कांग्रेस सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। हालांकि, एक साल बाद ही कोर्ट के आदेश के बाद प्रतिबंध हटा लिया गया। 

 सितंबर 2008 में भी कांग्रेस ने बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।  कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने एक टिप्पणी में कहा था, 'प्रतिबंध न केवल सिमी के खिलाफ लाया जाना चाहिए, बल्कि बजरंग दल और विहिप जैसे राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों में शामिल सभी संगठनों पर भी लगाना चाहिए।'

पूर्व केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के दिवंगत नेता रामचंद्र पासवान ने बजरंग दल को सांप्रदायिक संगठन बताते हुए कहा था, बजरंग दल और वीएचपी को तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी बजरंग दल और श्री राम सेना पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर चुकी हैं। 

अक्टूबर 2008 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने कर्नाटक में ईसाई स्थलों पर हमलों में कथित भूमिका के लिए बजरंग दल और विहिप पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की थी। 
 

विजयनगर में पीएम मोदी। - फोटो : अमर उजाला
भाजपा ने इस वादे पर कैसे हमला किया?
कांग्रेस के वादे के बाद भाजपा, कांग्रेस पर हमलावर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसपर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस ने पहले भगवान राम को बंद किया, अब हनुमान की पूजा करने वालों को भी बंद करना चाहती है। असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि कांग्रेस मुसलमानों को खुश करने के लिए बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने को कह रही है। कांग्रेस का घोषणापत्र पीएफआई और कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के घोषणापत्र जैसा दिखता है।
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