डाक विभाग में सिस्टम मैनेजर के पद पर तैनात सचिन वर्मा ने विभाग में हुए घोटाले की बाबत पूछताछ से परेशान होकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सचिन का शव मंगलवार सुबह कमरे में फंदे से लटका मिला। सचिन की खुदकुशी को विभाग में हुए 25 लाख रुपये के घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, एटीएम कार्ड चोरी और धोखाधड़ी के मामले में सचिन वर्मा नामजद नहीं थे।
सिविल लाइंस थाने के मोहल्ला नेकपुर गली नंबर तीन में रहने वाले 29 वर्षीय सचिन वर्मा मुख्य डाक घर में सिस्टम मैनेजर थे और अविवाहित थे। विभाग में 25 लाख रुपये का घपला उजागर होने के बाद सचिन डिप्रेशन में थे। उनसे विभागीय अफसरों ने सोमवार को पूछताछ भी की थी। सचिन के पिता कुमरपाल ने थाने में दी गई तहरीर में लिखा है कि सोमवार रात 8:30 बजे सचिन घर पहुंचा और बताया कि विभाग में बड़ा घोटाला हुआ है। अधिकारी उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर जेल भिजवाने की धमकी दे रहे हैं।
पिता का कहना है कि रात में ही घर पर सचिन के स्टाफ के श्रीकांत वर्मा आए और सचिन को अपने साथ ले गए। एक घंटे बाद सचिन घर लौटे और अपने कमरे में चले गए। सुबह पांच बजे पिता कमरे में पहुंचे तो बेटे का शव कमरे में पंखे में रस्सी के डाले गए फंदे से लटका मिला। दरवाजा खुला हुआ था। कुमरपाल वर्मा की तहरीर पर पुलिस ने आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज कर ली है, हालांकि उसमें किसी को अभियुक्त नहीं बनाया है। पुलिस इसे विभाग में हुए 25 लाख रुपये के घोटाले में खुदकुशी से जोड़कर देख रही है।